
देहरादून: उत्तराखंड नर्सिंग एकता मंच ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए घोषणा की है कि 5 दिसंबर से राज्यभर के नर्सिंग स्टाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। मंच का कहना है कि सचिवालय घेराव और ज्ञापन सौंपने के बावजूद एक सप्ताह में उनकी किसी भी मांग पर निर्णय नहीं लिया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में नर्सिंग स्टाफ पिछले कई महीनों से अपनी नियुक्ति और भर्ती से जुड़ी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। सचिवालय घेराव के दौरान मंच ने सरकार को एक सप्ताह का समय दिया था, ताकि पोर्टल, भर्ती प्रक्रिया और आयु-सीमा सहित प्रमुख मांगों पर निर्णय लिया जा सके। लेकिन समयसीमा पूरी होने के बाद भी कोई ठोस कदम न उठने से नर्सिंग समुदाय में नाराजगी बढ़ गई है।
प्रेस वार्ता और मंच की घोषणा
देहरादून में हुई प्रेस वार्ता में नर्सिंग एकता मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि 5 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा, जिसमें विभिन्न जनपदों से नर्सिंग कर्मी शामिल होंगे। उनका कहना है कि सरकार द्वारा बार-बार आश्वासन दिया गया, लेकिन भर्ती प्रक्रिया और नीतिगत फैसलों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
नर्सिंग स्टाफ की प्रमुख मांगें
मंच ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में चल रहे ऑनलाइन पोर्टल को तत्काल बंद किया जाए, क्योंकि इससे अभ्यर्थियों के बीच भ्रम पैदा हो रहा है और चयन प्रक्रिया में असमानता बढ़ रही है।
उनकी दूसरी महत्वपूर्ण मांग यह है कि नर्सिंग और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए वर्षवार भर्ती लागू की जाए। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबे समय से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को न्याय मिलेगा।
मंच ने यह भी कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और चिकित्सा स्वास्थ्य विभागों में भर्तियों को एक साथ जारी किया जाए। अलग-अलग समय पर भर्ती निकलने से अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बनती है, जो प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।
इसके साथ ही नर्सिंग स्टाफ ने मांग उठाई कि राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने के लिए IPHC (Indian Public Health Standards) के मानकों के अनुसार भर्ती की जाए, ताकि जनसंख्या के हिसाब से पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध हो सके और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर बने।
एक अन्य मांग यह है कि यदि वर्षवार भर्ती लागू की जाती है, तो ओवर-एज होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को आयु-छूट दी जाए, ताकि वर्षों से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित न हो।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून और आसपास के क्षेत्रों के अनेक नर्सिंग कर्मियों ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में देरी से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई युवाओं ने कहा कि बार-बार तिथियां आगे बढ़ने और नियम बदलने से अभ्यर्थी मानसिक तनाव में हैं। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने भी माना कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पदों के कारण काम का बोझ बढ़ा है और समय पर भर्ती आवश्यक है।
आगे क्या?
मंच ने कहा है कि यदि 5 दिसंबर से पहले सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो धरना जारी रहेगा और राज्यभर में प्रदर्शन तेज किए जाएंगे।
फिलहाल सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।







