
उत्तराखंड वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए सरकार ने 1993 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारी रंजन कुमार मिश्र को नया प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही राज्य के वन संरक्षण और प्रबंधन की सर्वोच्च जिम्मेदारी अब उनके पास आ गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड का लगभग 71 प्रतिशत क्षेत्र वन्य भू-भाग से घिरा है, इसलिए राज्य में प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पद न केवल वन संरक्षण नीति को दिशा देता है बल्कि मानव–वन्यजीव संघर्ष, जैव विविधता सुरक्षा, संरक्षण योजनाओं और वन प्रबंधन की रणनीतियों के लिए निर्णायक होता है।
नियुक्ति और भूमिका
रंजन कुमार मिश्र 1993 बैच के अनुभवी आईएफएस अधिकारी हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया है। अब वे प्रदेश के सभी वन प्रभागों, वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों और प्रबंधन योजनाओं की निगरानी का नेतृत्व करेंगे।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब मानव–वन्यजीव संघर्ष, वनाग्नि प्रबंधन, बाघ और हाथी संरक्षण जैसे मुद्दों पर विभाग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि रंजन कुमार मिश्र अपने शांत, अनुभवी और व्यवहारिक नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं, जिससे विभाग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
देहरादून के पर्यावरण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि नए प्रमुख वन संरक्षक के सामने राज्य में बढ़ती वन चुनौतियों से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी है।
आगे क्या?
नए हॉफ के रूप में मिश्र आने वाले दिनों में विभागीय प्राथमिकताएँ तय करेंगे। वनाग्नि प्रबंधन, संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को लेकर नई रणनीतियाँ तैयार की जा सकती हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही प्रभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्यव्यापी कार्ययोजना को आगे बढ़ाएंगे।





