
देहरादून: उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती के बीच गुलदारों के बढ़ते हमलों ने चिंता और गहरा दी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए राज्य में गुलदारों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में वन विभाग ने अब गुलदारों की नई गणना कराने का निर्णय लिया है, जो भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से कराई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार गणना केवल संख्या तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गुलदारों के व्यवहार, मूवमेंट पैटर्न और आबादी क्षेत्रों में बढ़ती उनकी मौजूदगी का भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा, ताकि भविष्य की रणनीति तय की जा सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में जब भी वन्यजीव हमलों की चर्चा होती है, तो सबसे अधिक नाम गुलदार का सामने आता है। गांवों और कस्बों के आसपास इसके हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। लंबे समय तक आधिकारिक गणना न होने के कारण यह सवाल उठता रहा कि आखिर गुलदारों की वास्तविक संख्या कितनी है। वर्ष 2008 के बाद पहली बार 2022 में विधिवत गणना कराई गई थी, जिसके आंकड़े बाद में सार्वजनिक किए गए।
आधिकारिक जानकारी
भारतीय वन्यजीव संस्थान भारतीय वन्यजीव संस्थान को इस वर्ष गुलदारों की गणना के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक आरके मिश्र ने बताया कि यह अध्ययन समग्र होगा। इसमें गुलदारों की संख्या के साथ-साथ उनके मूवमेंट पैटर्न, आवाजाही के रास्ते और मानव-संघर्ष के कारणों का भी विश्लेषण किया जाएगा, ताकि ठोस कदम उठाए जा सकें।
पिछली गणनाओं की स्थिति
वर्ष 2022 में हुई गणना में उत्तराखंड में गुलदारों की कुल संख्या 3115 आंकी गई थी। यह आंकड़ा अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किए गए आकलन को जोड़कर तैयार किया गया था।
2008 में यह संख्या 2335, 2005 में 2105 और 2003 में 2092 दर्ज की गई थी, जिससे समय के साथ इनकी संख्या में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि वन सीमा से सटे इलाकों में गुलदारों की मौजूदगी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है। कई लोगों का मानना है कि जंगलों में भोजन की कमी और मानव बस्तियों का विस्तार इसके प्रमुख कारण हैं, जिससे टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं।
आंकड़े / जानकारी
उत्तराखंड में वर्ष 2000 से 2025 के बीच गुलदारों के हमलों में 550 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2138 लोग घायल हुए हैं। इन आंकड़ों ने वन विभाग और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
हाथी गणना भी इसी वर्ष
गुलदारों के साथ-साथ राज्य में हाथियों की भी गणना इसी वर्ष कराई जाएगी। यमुना से शारदा नदी तक फैले राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व सहित 12 वन प्रभागों में यह सर्वे होगा। वर्ष 2003 में हाथियों की संख्या 1582 थी, जो 2020 में बढ़कर 2026 हो गई थी।
आगे क्या होगा
गुलदारों की इस नई गणना और व्यवहार अध्ययन के आधार पर वन विभाग मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए नई रणनीति तैयार करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक आंकड़ों के बिना स्थायी समाधान संभव नहीं है, ऐसे में यह अध्ययन भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।







