
देहरादून में उत्तराखंड के राज्य गठन को 25 वर्ष पूरे होने के साथ ही औद्योगिक विकास की तस्वीर भी काफी बदल चुकी है। वर्ष 2000–01 में जहां राज्य में करीब 14 हजार उद्योग थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 93,887 तक पहुंच गई है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयां शामिल हैं। इन उद्योगों में 55.58 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है और इससे पांच लाख 91 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। यह प्रगति इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि पर्वतीय राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड ने पर्यटन के साथ-साथ उद्योग के क्षेत्र में भी मजबूत पहचान बनाई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक यहां पर्यटन और तीर्थाटन को ही अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार माना जाता रहा। हालांकि बीते 25 वर्षों में औद्योगिक नीतियों, बुनियादी ढांचे और निवेश प्रोत्साहन के चलते राज्य ने उद्योगों के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार किया है। हाल के वर्षों में वैश्विक निवेशक सम्मेलन जैसे आयोजनों ने इस प्रक्रिया को और गति दी है।
आधिकारिक जानकारी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक 93,887 औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। इनमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई इकाइयों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। कुल निवेश 55.58 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है, जिससे प्रत्यक्ष रूप से पांच लाख 91 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है।
वैश्विक निवेशक सम्मेलन में 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के औद्योगिक करार किए गए थे, जिनमें से करीब एक लाख करोड़ रुपये के करार धरातल पर उतर चुके हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि उद्योगों के विस्तार से युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलने लगा है।
पर्वतीय इलाकों के निवासियों के अनुसार सेवा और ग्रीन उद्योगों के बढ़ने से पलायन पर भी अंकुश लगने की उम्मीद बढ़ी है।
संख्यात्मक विवरण
वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में हुए प्रमुख करार इस प्रकार हैं: ऊर्जा क्षेत्र में 1,03,459 करोड़ रुपये के 157 एमओयू, उद्योग क्षेत्र में 78,448 करोड़ रुपये के 658 एमओयू, आवास क्षेत्र में 41,947 करोड़ रुपये के 125 एमओयू और पर्यटन क्षेत्र में 47,646 करोड़ रुपये के 437 एमओयू। इसके अलावा उच्च शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में भी हजारों करोड़ रुपये के करार हुए हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है।
घर पर स्वरोजगार और पलायन पर असर
अक्षय ऊर्जा, हर्बल और एरोमेटिक्स, फूलों की खेती, पर्यटन, रिवर राफ्टिंग, एडवेंचर और तीर्थाटन जैसे सेवा क्षेत्र के ग्रीन उद्योगों से पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। मलारी, हर्षिल, पिथौरागढ़, बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे क्षेत्रों में सेवा उद्योगों के विस्तार से स्थानीय युवाओं को अपने घर के नजदीक ही रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं।
औद्योगिक कॉरिडोर की पहल
राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए ऊधम सिंह नगर जनपद के खुरपिया फार्म क्षेत्र में औद्योगिक कॉरिडोर स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस परियोजना से निवेश बढ़ाने, आधुनिक औद्योगिक ढांचा विकसित करने और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। क्षेत्र का चयन परिवहन सुविधाओं और उपलब्ध भूमि को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
कौशल विकास पर जोर
उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सरकार कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। देवभूमि उद्यमिता संस्थान के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को नवाचार से जोड़ा जा रहा है। आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण और सिलेबस तैयार किया जा रहा है।
चुनौतियां और उम्मीदें
औद्योगिक क्षेत्रों में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति, बेहतर संपर्क मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और महिला छात्रावास जैसी सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है। इसके साथ ही लैंड बैंक की स्थापना, एमएसएमई को बढ़ावा और पर्वतीय क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को गति देने की दिशा में भी काम किए जाने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को एक मजबूत औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करना है।
राज्य में एमएसएमई की स्थिति
| जनपद | उद्योग | रोजगार | निवेश (करोड़ ₹) |
|---|---|---|---|
| नैनीताल | 6437 | 29,494 | 1669.16 |
| ऊधम सिंह नगर | 12,385 | 84,500 | 4836.30 |
| अल्मोड़ा | 5874 | 15,355 | 344.40 |
| पिथौरागढ़ | 4697 | 11,462 | 180.17 |
| बागेश्वर | 2915 | 6,814 | 110.97 |
| चंपावत | 2894 | 8,730 | 134.34 |
| देहरादून | 12,197 | 80,999 | 2019.79 |
| पौड़ी | 8905 | 32,158 | 988.03 |
| टिहरी | 8623 | 25,694 | 859.09 |
| चमोली | 4520 | 10,309 | 173.02 |
| उत्तरकाशी | 5395 | 11,565 | 264.74 |
| रुद्रप्रयाग | 3585 | 10,127 | 309.40 |
| हरिद्वार | 15,170 | 1,32,863 | 5741.71 |
आगे क्या होगा
आने वाले वर्षों में औद्योगिक कॉरिडोर, कौशल विकास और ग्रीन उद्योगों के विस्तार से उत्तराखंड में निवेश और रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि पलायन जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी रोक लगेगी।





