
देहरादून: राज्य में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा निर्णय लिया है। वन विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को स्कूल लाने–ले जाने के लिए एस्कॉर्ट सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही पौड़ी में बढ़ती घटनाओं के मद्देनज़र वहां के डीएफओ को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश दिए गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पौड़ी और कई अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में हाल के महीनों में गुलदार और भालू जैसे वन्यजीवों के हमले बढ़े हैं। कई घटनाओं में ग्रामीण घायल हुए हैं और कुछ मामलों में जनहानि भी हुई है। इससे पहाड़ी इलाकों में दहशत का माहौल है, विशेषकर उन बस्तियों में जो जंगलों के नजदीक बसे हैं। बच्चों और महिलाओं के अकेले चलने पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
आधिकारिक जानकारी
सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए सख़्ती और संवेदनशीलता दोनों के साथ काम करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी घटना की सूचना मिलते ही 30 मिनट के भीतर वन विभाग की टीम मौके पर पहुँचनी चाहिए। इसके लिए संबंधित डीएफओ और रेंजर की सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सीएम ने प्रभावितों को त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। पौड़ी जिले में लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से डीएफओ को हटाने का आदेश जारी कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में जंगली जानवरों का खतरा ज्यादा है, वहाँ स्कूली बच्चों को स्कूल तक छोड़ने और वापस घर लाने के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा एस्कॉर्ट सुविधा अनिवार्य रूप से प्रदान की जाए।
दो सप्ताह में नई नीति का निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जिन परिवारों के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु वन्यजीव हमले में हो जाती है, ऐसे परिवारों की आजीविका प्रभावित होती है। इसलिए वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि दो सप्ताह के भीतर ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए नई राहत–नीति तैयार की जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न जिलों में मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जिन उपकरणों की आवश्यकता है—जैसे कैमरे, हाइलाइटिंग टॉर्च, सुरक्षा किट—उन्हें तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पौड़ी और आसपास के इलाकों के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजना अब जोखिम भरा हो गया था, ऐसे में एस्कॉर्ट सुविधा एक बड़ी राहत देगी। कई अभिभावकों ने बताया कि पिछले एक महीने में उन्होंने बच्चों को अकेले भेजना बिल्कुल बंद कर दिया था।
जंगल किनारे रहने वाले लोगों ने भी वन विभाग की देरी से पहुंचने की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि 30 मिनट की अनिवार्य समयसीमा न केवल भरोसा बढ़ाएगी, बल्कि कई दुर्घटनाएँ समय पर रोकी जा सकेंगी।
आगे क्या?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकना अब शीर्ष प्राथमिकता में है। इसके लिए उन्नत तकनीक, नियमित निगरानी और स्थानीय समुदाय के साथ लगातार संवाद पर जोर दिया जाएगा।
वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में झाड़ियाँ साफ करने, कैमरा निगरानी बढ़ाने और रेंजर–टीम को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से वन्यजीवों के व्यवहार और सावधानियों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में मानव–वन्यजीव संघर्ष के समाधान के लिए व्यापक नीति लागू की जा सकती है।







