
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 30 जनवरी को दो अहम मामलों में सुनवाई करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसले दिए। एक ओर जहां उत्तराखंड परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों से की जा रही रिकवरी पर रोक लगाई गई, वहीं दूसरी ओर डिस्पेंसरी में उपनल के माध्यम से वर्षों से कार्यरत फार्मासिस्टों को भी अंतरिम राहत प्रदान की गई। कोर्ट के इन आदेशों को सेवा सुरक्षा और कर्मचारी अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
उत्तराखंड परिवहन निगम से सेवानिवृत्त हुए जगदीश प्रसाद पंत, राम सिंह और सुरेश चंद्र मासीवाल ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कई वर्षों की संतोषजनक सेवा के बाद सेवानिवृत्ति के समय उन्हें वैधानिक लाभ दिए गए थे, लेकिन अब निगम उन लाभों की वसूली कर रहा है। याचिकाओं में यह तर्क दिया गया कि एक बार दिए गए सेवानिवृत्त लाभों की दोबारा वसूली नियमों और पूर्व न्यायिक निर्णयों के विरुद्ध है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मामले की सुनवाई के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व में दिए गए न्यायिक आदेशों का हवाला देते हुए परिवहन निगम द्वारा जारी रिकवरी आदेशों पर रोक लगा दी और याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।
इसी दिन अदालत ने उपनल के माध्यम से डिस्पेंसरी में कार्यरत फार्मासिस्टों के मामलों पर भी सुनवाई की। न्यायालय ने राज्य सरकार, चिकित्सा सेवा भर्ती बोर्ड, उपनल और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कर्मचारियों और उनके परिजनों ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि लंबे समय से वे मानसिक दबाव में थे। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के इस आदेश से सेवानिवृत्त कर्मचारियों और संविदा कर्मियों दोनों को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।
आगे क्या होगा
न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की अवकाशकालीन एकल पीठ ने उपनल के माध्यम से कार्यरत दीपक कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं को अंतिम निर्णय तक वर्तमान पदों पर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित विभागों को इनके पद सुरक्षित रखने को कहा गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इसे इसी तरह की एक अन्य याचिका संख्या 121/2026 के साथ सूचीबद्ध किया जाए, ताकि दोनों मामलों पर एक साथ विचार हो सके।





