
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करते हुए राहत प्रदान की है। पहला मामला उत्तराखंड जल संस्थान के सहायक अभियंताओं (AE) की 2013-14 की चयन सूची और 2021 की वरिष्ठता सूची को रद्द करने के पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल के आदेश से संबंधित है, जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी। दूसरा मामला ऊधमसिंह नगर के प्राग फार्म की फसल कटाई और बिक्री से जुड़ा है, जिसमें एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाई गई। दोनों मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। जल संस्थान मामले की अगली सुनवाई दिसंबर 2025 में होगी, जबकि प्राग फार्म मामले की सुनवाई आज, 17 अक्टूबर 2025 को होगी।
जल संस्थान AE चयन और वरिष्ठता सूची विवाद
पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल ने 8 अगस्त 2025 को जल संस्थान के मैकेनिकल और इलेक्ट्रिक विंग के सहायक अभियंताओं की याचिका पर सुनवाई के बाद 2013-14 की चयन सूची और 2021 की वरिष्ठता सूची को रद्द कर दिया था। याचिकाकर्ता इंजीनियरों ने दावा किया कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने मेरिट सूची बनाते समय मैकेनिकल और इलेक्ट्रिक विंग के अभ्यर्थियों के अंकों में स्केलिंग की, जबकि सिविल विंग के अभ्यर्थियों के अंकों में स्केलिंग नहीं की गई। इसके परिणामस्वरूप, सिविल विंग के 10 अभ्यर्थी और मैकेनिकल/इलेक्ट्रिक विंग के 5 अभ्यर्थी सहायक अभियंता के रूप में चयनित हुए, जो वर्तमान में जल संस्थान के विभिन्न खंडों में प्रभारी अधिशाषी अभियंता के पद पर कार्यरत हैं।
इस आदेश को अमित कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि चयन सूची 12 साल पुरानी और वरिष्ठता सूची 4 साल पुरानी है, इसलिए अब इन पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। दोनों पक्षों को सुनने के बाद, मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल के 8 अगस्त 2025 के आदेश पर रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर 2025 में निर्धारित की गई है।
प्राग फार्म फसल विवाद: एकलपीठ के आदेश पर रोक
ऊधमसिंह नगर के प्राग फार्म की भूमि पर खड़ी फसल की कटाई और बिक्री से संबंधित मामले में हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि प्राग फार्म की फसल की बिक्री राज्य सरकार करेगी और उससे प्राप्त धन को एक अलग खाते में रखा जाएगा। इस आदेश को माधवी अग्रवाल और अन्य ने विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी।
अपीलकर्ता के अधिवक्ता टीए खान ने तर्क दिया कि एकलपीठ का फैसला गलत है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं का दावा है कि फसल पर उनका हक है, भले ही सरकार ने जमीन पर कब्जा कर लिया हो। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि प्रावधान उनके पक्ष में हैं और फसल की बिक्री का अधिकार सरकार को है। सरकार ने यह भी दावा किया कि ऊधमसिंह नगर जिला प्रशासन ने फसल काट दी है, जबकि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फसल अभी भी खड़ी है।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर 2025 को होगी।
पृष्ठभूमि: जल संस्थान और प्राग फार्म के विवाद
उत्तराखंड जल संस्थान के सहायक अभियंताओं की भर्ती और वरिष्ठता सूची का मामला लंबे समय से विवादास्पद रहा है। 2013-14 की भर्ती में चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं ने कई इंजीनियरों को प्रभावित किया। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, जल संस्थान में कार्यरत लगभग 150 सहायक अभियंता इस विवाद से प्रभावित हैं, जिनमें से कई वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं। पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल के आदेश ने इन इंजीनियरों की स्थिति को अनिश्चित कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट की रोक ने फिलहाल स्थगित कर दिया है।
प्राग फार्म का मामला ऊधमसिंह नगर में जमीन और फसल के स्वामित्व से जुड़ा है। यह फार्म क्षेत्र में कृषि और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। 2024 की एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, प्राग फार्म की जमीन पर स्वामित्व विवाद के कारण कई कानूनी मामले दर्ज हुए हैं। याचिकाकर्ताओं और सरकार के बीच फसल की बिक्री और स्वामित्व का मुद्दा अभी अनसुलझा है।
निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद
उत्तराखंड हाईकोर्ट की यह सुनवाई जल संस्थान और प्राग फार्म से जुड़े पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आई है। जल संस्थान के सहायक अभियंताओं की चयन और वरिष्ठता सूची पर रोक से कर्मचारियों को अस्थायी राहत मिली है, जबकि प्राग फार्म मामले में फसल की बिक्री पर रोक ने याचिकाकर्ताओं के दावे को बल दिया है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों मामलों में निष्पक्ष सुनवाई का आश्वासन दिया है। दिसंबर 2025 और 17 अक्टूबर 2025 की सुनवाई इन मामलों की दिशा तय करेगी।







