
देहरादून: उत्तराखंड ने एक और नवाचार के साथ देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। समान नागरिक संहिता लागू करने के बाद अब उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने मत्स्य पालन क्षेत्र में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) का उपयोग शुरू किया है। देहरादून में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी सिस्टम और अंतःस्थलीय जल कृषि में अवसंरचना एवं लाईवस्टॉक बीमा योजना का शुभारंभ किया गया। इस पहल से मत्स्य पालकों को पारदर्शी, सुरक्षित और त्वरित लाभ मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
उत्तराखंड सरकार द्वारा मत्स्य पालन क्षेत्र में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मत्स्य विभाग ने भारतीय रिज़र्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी सिस्टम विकसित किया है। इसका उद्देश्य सरकारी अनुदानों के उपयोग को निर्धारित उद्देश्य तक सीमित रखते हुए लीकेज को रोकना और लाभार्थियों तक सीधा लाभ पहुंचाना है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान मत्स्य विभाग के मंत्री सौरभ बहुगुणा ने सीबीडीसी प्रणाली और बीमा योजना का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि अभी तक डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में राशि भेजी जाती थी, लेकिन नई सीबीडीसी प्रणाली के तहत योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि सीबीडीसी पूरी तरह सुरक्षित, कानूनी मान्यता प्राप्त और भरोसेमंद व्यवस्था है, जिससे अनुदान का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए हो सकेगा, जिसके लिए उसे जारी किया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मत्स्य पालकों का कहना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से उन्हें अनुदान के उपयोग में पारदर्शिता मिलेगी और भुगतान में देरी की समस्या दूर होगी। बीमा योजना के शुरू होने से प्राकृतिक आपदाओं में होने वाले नुकसान की भरपाई को लेकर भी उन्हें राहत मिलेगी।
आंकड़े और तथ्य
कार्यक्रम के दौरान वित्तीय वर्ष 2025–26 में आपदा के कारण नुकसान झेल चुके मत्स्य पालकों को करीब 43 लाख रुपये मुआवजे के रूप में वितरित किए गए।
बीमा योजना के तहत इंश्योरेंस प्रीमियम का 90 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 10 प्रतिशत हिस्सा मत्स्य पालकों द्वारा दिया जाएगा। यह बीमा प्राकृतिक आपदाओं से मछलियों और संरचनाओं को कवर करेगा।
आगे क्या होगा
सरकार का लक्ष्य है कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सभी पात्र लाभार्थियों को सीबीडीसी आधारित भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाए। आने वाले समय में अन्य विभागों में भी इस डिजिटल मॉडल को अपनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ और अधिक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
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