
देहरादून: उत्तराखंड सरकार की आय में अहम भूमिका निभाने वाला आबकारी विभाग एक तरफ जहां 2024–25 में करीब 4000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर चुका है और चालू वित्तीय वर्ष में 5400 करोड़ से अधिक का लक्ष्य लेकर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर फील्ड पर काम करने वाले कर्मचारियों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। आबकारी निरीक्षकों और फील्ड स्टाफ का कहना है कि बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की कमी, कार्यालयों का अभाव और संसाधनों की नाकाफी व्यवस्था के कारण प्रवर्तन कार्य चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, जबकि विभाग से राजस्व की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में जीएसटी के बाद आबकारी विभाग सबसे बड़ा राजस्व अर्जक माना जाता है। इसके बावजूद, लंबे समय से फील्ड स्तर पर संसाधनों की कमी को लेकर कर्मचारी संगठन आवाज उठाते रहे हैं। बढ़ती तस्करी, प्रवर्तन की जिम्मेदारियां और ऑनलाइन प्रक्रियाओं के बीच संसाधनों का अभाव विभागीय कार्यक्षमता पर असर डाल रहा है।
फील्ड स्टाफ की चुनौतियां
आबकारी निरीक्षकों की यूनियन का कहना है कि प्रदेशभर में निरीक्षकों के लिए गिने-चुने स्थानों पर ही कार्यालय उपलब्ध हैं। कई क्षेत्रों में न तो स्थायी कार्यालय हैं और न ही जब्त माल रखने के लिए अधिकृत मालखाना। अवैध शराब या तस्करी में पकड़े गए माल को निजी किराये के मकानों में रखना पड़ता है, जो व्यावहारिक और सुरक्षा—दोनों दृष्टि से कठिन है।
इसके अलावा पेट्रोलिंग और कार्रवाई के लिए पर्याप्त वाहन उपलब्ध नहीं हैं। बदलते दौर में अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने के बावजूद फील्ड निरीक्षकों को लैपटॉप या डाटा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। हथियारों की उपलब्धता भी सीमित बताई जा रही है।
कर्मचारी पक्ष
आबकारी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष शिव सिंह व्यास का कहना है कि विभाग का ढांचा कमजोर संसाधनों पर टिका है। उनके अनुसार फील्ड में कार्यालय, मालखाना, वाहन और आईटी संसाधन उपलब्ध कराए बिना प्रभावी प्रवर्तन संभव नहीं है।
आधिकारिक जानकारी
आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने माना कि संसाधनों को लेकर उठाए गए सवाल वाजिब हैं। उन्होंने बताया कि विभाग लंबे समय से इन कमियों को दूर करने पर काम कर रहा है और मुख्यमंत्री स्तर पर भी दिशा-निर्देश मिल रहे हैं। आयुक्त के अनुसार, विभाग अपने पुराने सर्वर को अपग्रेड कर आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करेगा, जिसके लिए बजट का प्रावधान किया गया है। अपग्रेड के बाद रियल-टाइम मॉनिटरिंग के जरिए गतिविधियों की निगरानी संभव होगी।
नई भर्तियां और प्रस्ताव
आयुक्त ने बताया कि हाल ही में 28 नए आबकारी आरक्षियों की नियुक्ति की गई है, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 93 प्रतिशत है। इसके अलावा निरीक्षक संवर्ग में भी नई आमद हुई है। फील्ड स्टाफ की अन्य मांगों को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं, जिन पर प्रक्रिया जारी है। भवन, वाहन और उपकरणों से जुड़े प्रस्तावों पर भी काम चल रहा है।
आगे क्या होगा
विभाग के अनुसार चरणबद्ध तरीके से फील्ड की दिक्कतों का समाधान किया जाएगा। आईटी अपग्रेड, मानव संसाधन की तैनाती और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से प्रवर्तन क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार की जा रही है। आने वाले महीनों में इन कदमों का असर फील्ड पर दिखने की उम्मीद है।







