
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अवैध धर्मांतरण, अतिक्रमण, और दंगा फैलाने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त कार्रवाई का संदेश दिया है। सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर CM धामी ने लिखा, “दीपावली में जैसे दीपों की ज्योति अंधकार को समाप्त करती है, वैसे ही हमारी सरकार सुशासन का दीप प्रज्वलित कर जिहादी और नक्सली सोच को खत्म करने के लिए काम कर रही है।” सरकार ने 9,000 एकड़ सरकारी जमीन को ‘लैंड जिहादियों’ से मुक्त कराया है और 250 अवैध मदरसों को सील किया है।
जीरो टॉलरेंस की नीति
धामी सरकार ने अवैध अतिक्रमण, धर्मांतरण, और अवैध धार्मिक निर्माणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। 2024 की एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में पिछले साल 5,000 से अधिक अवैध ढांचों पर कार्रवाई की गई थी। CM धामी ने रुड़की में BJP कार्यालय उद्घाटन के दौरान कहा, “हमने 9,000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है, 250 अवैध मदरसों को सील किया गया है, और 500 से अधिक अवैध ढांचों को ध्वस्त किया गया है। यह कार्रवाई अभी भी जारी है।”
स्थानीय निवासी रमेश शर्मा ने कहा, “सरकार का यह कदम सरकारी जमीन की रक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए जरूरी है।”
ऑपरेशन कालनेमि: सनातन धर्म की रक्षा
CM धामी ने ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत सनातन हिंदू धर्म को बदनाम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा, “छद्मवेशी लोग जो हिंदू संतों का ढोंग रचकर ठगी करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो रही है।” 2024 में उत्तराखंड में 100 से अधिक छद्मवेशियों पर कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा, सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का फैसला लिया है।
मदरसा बोर्ड समाप्ति और कार्रवाई
मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय उत्तराखंड में धार्मिक और शैक्षिक पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। 2024 की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, अवैध मदरसों में शिक्षा मानकों का उल्लंघन और अवैध गतिविधियां पाई गई थीं। CM धामी ने कहा, “हमारी सरकार सुशासन और सामाजिक सौहार्द के लिए प्रतिबद्ध है।”
स्थानीय BJP कार्यकर्ता अनिल रावत ने कहा, “CM धामी का यह एक्शन उत्तराखंड की पहचान को बचाने वाला है। अवैध गतिविधियों पर रोक जरूरी थी।”
सामाजिक और सियासी चर्चा
CM धामी की यह कार्रवाई सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी है। विपक्ष ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया, जबकि समर्थकों ने इसे सनातन संस्कृति और कानून व्यवस्था की जीत करार दिया। 2024 में उत्तराखंड में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में 20,000 लोग प्रभावित हुए, लेकिन सरकार ने इसे सार्वजनिक हित में बताया।







