
देहरादून: वित्तीय वर्ष 2025-26 को समाप्त होने में अब केवल दो महीने शेष हैं। ऐसे में उत्तराखंड शासन ने पूंजीगत व्यय और विभिन्न विभागीय योजनाओं के खर्च में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने सीएसएस, ईएपी, नाबार्ड समेत अन्य योजनाओं के प्रस्ताव समय पर भेजने, परियोजनाओं की कड़ी मॉनिटरिंग और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। यह निर्णय इसलिए अहम है क्योंकि समय पर खर्च और गुणवत्तापूर्ण कार्य न होने से योजनाएं प्रभावित होती हैं और इसका सीधा असर जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हर वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में योजनाओं के बजट उपयोग को लेकर शासन स्तर पर समीक्षा की जाती है। पूर्व में कई परियोजनाएं समय पर पूरी न होने और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन इस बार सख्त टाइमलाइन और निगरानी व्यवस्था लागू करना चाहता है, ताकि विकास कार्यों का लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचे।
आधिकारिक जानकारी
बैठक में मुख्य सचिव ने पूंजीगत व्यय, सीएसएस, ईएपी, नाबार्ड, एसएएससीआई, एसएनए स्पर्श और विभागीय व्यय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने रीइंबर्समेंट दावों को समय पर करने, सभी परियोजनाओं के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तय करने और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
वित्त और नियोजन विभाग को इंडिपेंडेंट थर्ड पार्टी मूल्यांकन के लिए मजबूत मैकेनिज्म तैयार करने को कहा गया। जिन परियोजनाओं में थर्ड पार्टी मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है, वहां इसे तत्काल लागू करने के निर्देश भी दिए गए।
जल और पेयजल योजनाओं पर निर्देश
मुख्य सचिव ने जल संस्थान को 31 मार्च तक देहरादून की सभी सरकारी कॉलोनियों में वाटर मीटर लगाने का लक्ष्य दिया। इसके साथ ही प्रदेश के सभी नगर निगम क्षेत्रों में भी वाटर मीटर लगाने पर जोर दिया गया, ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके।
दूषित पानी की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। सौंग बांध परियोजना के तहत पेयजल घटक की डीपीआर एक सप्ताह में शासन को सौंपने को कहा गया।
एसटीपी, जीरो कार्बन और क्लाइमेट चेंज फंड
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले ट्रीटेड पानी को नॉन-ड्रिंकिंग कार्यों में उपयोग करने पर बल दिया गया। जल संस्थान को सिंचाई विभाग के साथ समन्वय कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए।
पेयजल योजनाओं को जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में ले जाने, सोलर एनर्जी को बैटरी सिस्टम से जोड़ने और क्लाइमेट चेंज फंड के उपयोग पर भी जोर दिया गया। सभी एसटीपी की 24×7 रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए।
सिंचाई और कृषि से जुड़े निर्देश
सिंचाई विभाग को प्रदेश की कुल 15 प्रतिशत सिंचित भूमि को अगले पांच वर्षों में बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य दिया गया। नए बैराज, नहरों और गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं पर काम करने को कहा गया।
प्रदेशभर में स्प्रिंकलर सिस्टम लागू करने, बंद पड़ी सिंचाई योजनाओं को दुरुस्त करने और लघु सिंचाई परियोजनाओं के बेहतर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
शहरी विकास और पर्यटन योजनाएं
शहरी विकास विभाग को देहरादून सहित अन्य बड़े शहरों में बड़े पार्क विकसित करने के निर्देश दिए गए। टिहरी को इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने, टिहरी झील रिंग रोड परियोजना शुरू करने और पर्यटन विभाग को टिहरी, ऋषिकेश और चंपावत में पर्यटन विकास के प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया।
वन विभाग को सिटी ग्रीनिंग, एक्सप्रेस-वे और बायो फेंसिंग के मॉडल प्रोजेक्ट तैयार करने तथा आईटी विभाग को साइंस सिटी और विज्ञान केंद्रों की स्थापना व संचालन के लिए मैकेनिज्म बनाने के निर्देश दिए गए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि योजनाओं पर समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ काम होता है तो शहरों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी। व्यापारियों ने भी उम्मीद जताई कि जल और पर्यटन से जुड़े फैसलों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
आगे क्या होगा
अब संबंधित विभागों को तय समयसीमा के भीतर प्रस्ताव भेजने और परियोजनाओं पर काम शुरू करने की जिम्मेदारी दी गई है। शासन स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की संभावना जताई गई है।







