
देहरादून: उत्तराखंड में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान निर्देश दिए कि भूमि अभिलेखों से जुड़े सभी पोर्टल शीघ्र शुरू किए जाएं और भूलेख पोर्टल को एक जनवरी से अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। इस पहल से आम नागरिकों को खसरा, खतौनी, नक्शा और स्वामित्व विवरण ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम होंगे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में लंबे समय से भूमि अभिलेखों से जुड़े कार्यों में देरी, पारदर्शिता की कमी और विवादों की शिकायतें सामने आती रही हैं। कागजी प्रक्रिया और मैनुअल सत्यापन के कारण नागरिकों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
आधिकारिक जानकारी
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने एनआईसी, आईटीडीए और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में भूलेख पोर्टल को एक जनवरी से अनिवार्य रूप से शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूलेख पोर्टल के जरिए नागरिक अपनी भूमि से जुड़े खसरा, खतौनी, नक्शा और स्वामित्व विवरण ऑनलाइन देख सकेंगे। साथ ही दाखिल-खारिज का स्टेटस अपडेट होते ही संबंधित व्यक्ति को व्हाट्सएप और एसएमएस के माध्यम से सूचना देने के निर्देश भी दिए गए हैं। आरओआर में किसी भी परिवर्तन के साथ रिकॉर्ड स्वतः सर्वर में अपडेट होगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
नागरिकों का कहना है कि यदि भूमि से जुड़े सभी रिकॉर्ड आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध होंगे तो समय और धन दोनों की बचत होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने बताया कि डिजिटल व्यवस्था से दलालों पर निर्भरता कम होगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
संख्या / आंकड़े
भूलेख पोर्टल 1 जनवरी से अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
आरसीएमएस पोर्टल को 26 जनवरी 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
दाखिल-खारिज और आरओआर से जुड़ी सूचनाएं एसएमएस और व्हाट्सएप से उपलब्ध होंगी।
आगे क्या होगा
मुख्य सचिव ने आरसीएमएस यानी रेवेन्यू कोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम को भी तय समयसीमा में लागू करने के निर्देश दिए हैं, जिससे राजस्व न्यायालयों को ई-कोर्ट प्रणाली से जोड़ा जा सके। इस पोर्टल के माध्यम से लंबित मामलों का ऑनलाइन पंजीकरण, सुनवाई की तिथि, आदेश और स्थिति की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होगी। साथ ही पटवारी और कानूनगो स्तर पर सत्यापन की समय-सीमा तय कर मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने पर रोक लगेगी।







