
उत्तराखंड में जंगली जानवरों, खासकर भालुओं और गुलदारों के बढ़ते हमलों ने गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे भी डर के साए में घर से निकल रहे हैं। आए दिन बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में चमोली जिले में एक छात्र को भालू द्वारा उठाकर ले जाने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पिछले लंबे समय से जंगली जानवरों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। खेतों में काम कर रही महिलाएं, आंगन में खेलते बच्चे और शाम को घर लौट रहे ग्रामीण अक्सर इन हमलों का शिकार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा भालू के हमले गढ़वाल मंडल में सामने आ रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल बना हुआ है।
आधिकारिक जानकारी
प्रदेश सरकार के अनुसार चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे जिलों में स्थिति ज्यादा गंभीर है। रुद्रप्रयाग जिले में बीते तीन महीनों में भालू 20 लोगों पर हमला कर चुका है। बदरीनाथ वन प्रभाग में दो लोगों की मौत और 14 लोग घायल हुए हैं। उत्तरकाशी में भालू के हमलों में अब तक दो लोगों की जान जा चुकी है और 15 लोग घायल हुए हैं। पौड़ी जिले में 12 घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत और करीब 50 पशुओं के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे अब अकेले स्कूल जाने से डर रहे हैं। कई गांवों में अभिभावक खुद बच्चों को छोड़ने जाने को मजबूर हैं। लोगों का आरोप है कि लंबे समय से समस्या बनी होने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
क्या बोले मंत्री
उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि जिन जिलों में भालू और गुलदार की आवाजाही ज्यादा है, वहां जिलाधिकारियों के माध्यम से स्कूलों के समय में आंशिक बदलाव किया गया है। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में बुश कटर, सोलर लाइट, फूड वेस्ट के बेहतर निस्तारण और स्कूलों व आंगनबाड़ियों के आसपास झाड़ियां काटने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में लगातार हमले हो रहे हैं, वहां की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को लेनी होगी।
विशेषज्ञ की राय
राजाजी टाइगर रिजर्व के पूर्व निदेशक सनातन सोनकर ने कहा कि यह समस्या नई नहीं है। जंगली जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और केयरिंग कैपेसिटी पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उनका कहना है कि अब भालू और गुलदार गांवों, कस्बों और स्कूलों तक पहुंच रहे हैं, जिसके लिए विभाग को दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी।
सीएम धामी की पहल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस गंभीर मसले पर केंद्रीय वन मंत्री से फोन पर बातचीत कर उत्तराखंड के लिए विशेष रणनीति बनाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने चमोली जिले के पोखरी स्कूल के उन बच्चों से भी बातचीत की, जिन्होंने भालू के हमले से किसी तरह जान बचाई थी, और उनके साहस की सराहना की। उन्होंने वन विभाग को स्कूलों, आंगनबाड़ियों और आबादी वाले क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार और वन विभाग द्वारा अल्पकालिक उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए जंगली जानवरों की आबादी, जंगलों की स्थिति और मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर व्यापक नीति बनानी होगी। आने वाले दिनों में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद की जा रही है।





