
देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को राज्य गठन के 25 वर्षों के सफर और भविष्य के रोडमैप पर हुई चर्चा के दौरान स्थायी राजधानी गैरसैंण का मुद्दा एक बार फिर छा गया। विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक तिलक राज बेहड़ ने स्पष्ट कहा कि अब गैरसैंण को स्थायी राजधानी नहीं बनाया जा सकता। उनका यह बयान कांग्रेस के भीतर मतभेदों को उजागर करता दिखा, क्योंकि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा था कि यदि 2027 में कांग्रेस सत्ता में आती है तो गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाएगा।
विधानसभा में गैरसैंण का मुद्दा छाया
राज्य गठन की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष सत्र में स्थायी राजधानी को लेकर जोरदार चर्चा हुई। अधिकांश विधायकों ने माना कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ों में होनी चाहिए, ताकि शासन और विकास का लाभ वहां तक पहुंचे जहां से यह आंदोलन शुरू हुआ था।
लेकिन, कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ ने स्पष्ट कहा —
“गैरसैंण पहले ही ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित की जा चुकी है। ऐसे में उसे स्थायी राजधानी बनाना अब संभव नहीं है। राजधानी देहरादून में ही रहनी चाहिए।”
हरीश रावत के बयान से विपरीत राय
तिलक राज बेहड़ का यह बयान उस समय आया है जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही गैरसैंण को लेकर राजनीतिक प्रतिबद्धता जता चुके हैं।
हरीश रावत ने हाल ही में कहा था —
“अगर 2027 में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाएगा।”
बेहड़ के बयान के बाद कांग्रेस के अंदर ही दो राय सामने आ गई हैं, जिससे पार्टी के भीतर विचार-विमर्श और असमंजस की स्थिति बन गई है।
नेता प्रतिपक्ष का बयान — “पार्टी तय करेगी स्टैंड”
इस मामले में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि
“गैरसैंण को लेकर किसी एक व्यक्ति का बयान पार्टी की नीति नहीं होता। ऐसे मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी का स्टैंड सामूहिक रूप से तय किया जाता है।”
उन्होंने कहा कि गैरसैंण में आधारभूत ढांचे के विकास में कांग्रेस ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और भविष्य में भी पार्टी इस दिशा में काम करने को प्रतिबद्ध है।
भाजपा ने साधा निशाना
कांग्रेस नेताओं के विरोधाभासी बयानों पर भाजपा विधायक विनोद चमोली ने चुटकी लेते हुए कहा —
“लगता है तिलक राज बेहड़ हरीश रावत को अपना नेता नहीं मानते या फिर कांग्रेस में कोई अनुशासन नहीं बचा। हरीश रावत कुछ भी बोल देते हैं और बाकी नेता कुछ और कहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा —
“कांग्रेस ने 10 साल तक शासन किया, लेकिन उस दौरान गैरसैंण को स्थायी राजधानी क्यों नहीं बनाया? अब विपक्ष में बैठकर सिर्फ राजनीति करना आसान है।”
राजधानी के सवाल पर जनता भी बंटी हुई
विधानसभा में हुई इस बहस के बाद जनता के बीच भी दो मत देखने को मिल रहे हैं। कई लोग अब भी चाहते हैं कि राजधानी गैरसैंण या किसी पहाड़ी क्षेत्र में हो, ताकि विकास का संतुलन बना रहे। वहीं, कुछ लोग देहरादून को ही उपयुक्त राजधानी बताते हैं, क्योंकि यहां सुविधाएँ, संपर्क मार्ग और प्रशासनिक ढाँचा पहले से तैयार है।






