
देहरादून: उत्तराखंड में उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्रदेश में 25 नवंबर 2025 तक 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर चुके उपनल के 11,097 कर्मचारी अब समान कार्य के बदले समान वेतन की सुविधा के दायरे में आ जाएंगे। राज्य सरकार के इस फैसले से लंबे समय से वेतन समानता की मांग कर रहे कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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पृष्ठभूमि और संदर्भ
राज्य सरकार ने इस वर्ष 15 जनवरी को कैबिनेट बैठक में उपनल कर्मचारियों को समान वेतन देने का निर्णय लिया था। यह फैसला लंबे समय से चली आ रही मांगों और न्यायालयीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप माना जा रहा है। इसके बाद शासन स्तर पर शासनादेश (जीओ) जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई, जो अब अंतिम चरण में बताई जा रही है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
वित्त विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सैनिक कल्याण विभाग द्वारा जीओ का ड्राफ्ट तैयार कर वित्त विभाग को परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। वित्त स्तर पर इसके बिंदुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
जीओ जारी होने के बाद दो महीने के भीतर संबंधित विभागों को पात्र कर्मचारियों के साथ नया अनुबंध करना अनिवार्य होगा। इसके बाद कर्मचारियों को तय मानकों के अनुसार समान वेतन दिया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उपनल कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद यह निर्णय उनके लिए बड़ी राहत है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि जीओ जारी होते ही वेतन असमानता की समस्या खत्म होगी और आर्थिक स्थिरता आएगी।
आंकड़े और तथ्य
कुल 11,097 उपनल कर्मचारी इस सुविधा के दायरे में आएंगे, जिन्होंने 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर ली है।
सूत्रों के अनुसार, पद के सापेक्ष नियुक्त कर्मचारियों को तो लाभ मिलेगा ही, साथ ही बिना पद के लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को भी समान वेतन के दायरे में शामिल किया जाएगा। इन कर्मचारियों के लिए पद सृजन को लेकर अलग से निर्णय लिया जाएगा।
आगे क्या होगा
जीओ जारी होने के बाद विभागवार पात्रता सूची तैयार की जाएगी। इसके साथ ही नए अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने पर कर्मचारियों को समान वेतन का भुगतान शुरू हो जाएगा। शासन स्तर पर निगरानी रखे जाने की बात कही जा रही है, ताकि प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।





