
देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सहकारी निरीक्षक और सहायक विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा रविवार को अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच सम्पन्न हुई। पेपर लीक मामले के बाद आयोजित इस पहली परीक्षा में मजिस्ट्रेट स्वयं प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं लेकर केंद्रों तक पहुंचे। गेट पर बायोमीट्रिक हाजिरी और सख्त चेकिंग के बाद ही अभ्यर्थियों को परीक्षा कक्षों में जाने दिया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक प्रकरण के बाद यूकेएसएसएससी पर लगातार निगरानी बढ़ गई थी। आयोग के सामने चुनौती थी कि परीक्षाओं में फिर से पारदर्शिता और विश्वसनीयता स्थापित की जाए। इसी कारण इस बार परीक्षा प्रक्रिया में कठोर व्यवस्थाएँ लागू की गईं। आयोग ने देहरादून और नैनीताल जिले में 26 परीक्षा केंद्र बनाए थे, जहां कुल 13,079 अभ्यर्थी पंजीकृत थे।
आधिकारिक जानकारी
आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 13,079 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 8,651 ने आयोग की वेबसाइट से प्रवेश पत्र डाउनलोड किए थे, जिनमें से 6,505 अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचे। कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों के सापेक्ष उपस्थिति लगभग 50 प्रतिशत रही, जबकि प्रवेश पत्र डाउनलोड करने वालों में यह अनुपात 75.19 प्रतिशत दर्ज किया गया।
परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू होनी थी, लेकिन अभ्यर्थियों की एंट्री सुबह 8:30 बजे से ही शुरू कर दी गई थी। प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग लगाई गई थी और पुलिस ने प्रत्येक अभ्यर्थी की गहन जांच की। गेट पर ही बायोमीट्रिक हाजिरी पूरी की गई। सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि परीक्षा कक्षों के साथ-साथ शौचालयों में भी जैमर लगाए गए थे, ताकि किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक गतिविधि संभव न हो।
परीक्षा से पहले सभी केंद्रों की ग्रेडिंग और सुरक्षा ऑडिट किया गया था। इसके अतिरिक्त एक दिन पूर्व सीसीटीवी, जैमर और अन्य उपकरणों का मॉक ट्रायल भी किया गया। प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका को जिला प्रशासन द्वारा नामित मजिस्ट्रेट ने पुलिस सुरक्षा में ट्रेजरी से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाया। परीक्षा के बाद इसी सुरक्षा व्यवस्था में प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं वापस ट्रेजरी भेजी गईं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों ने माना कि इस बार व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक कड़ी थी। कुछ अभ्यर्थियों का कहना था कि बायोमीट्रिक और जैमर की वजह से परीक्षा प्रणाली पर उनका भरोसा बढ़ा है। वहीं, कई परीक्षा केंद्रों के बाहर पुलिस तैनाती और लगातार जांच से माहौल पूरी तरह अनुशासित दिखा।
आगे की स्थिति
आयोग की ओर से जारी एसओपी का पूरी तरह पालन किया गया। आयोग कार्यालय में एक अलग कंट्रोल रूम बनाया गया था, जहां से सभी केंद्रों की रियल टाइम निगरानी की जाती रही। परीक्षा केंद्रों के आसपास भी पुलिस ने विशेष जांच अभियान चलाया। कड़े प्रबंधों का ही परिणाम रहा कि सभी केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और किसी भी तरह की गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली।






