
देहरादून: देहरादून में यूकॉस्ट द्वारा आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन और 20वें राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन की शुरुआत शुक्रवार को हुई। पहले दिन केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्घाटन सत्र में भाग लिया। दोनों ने पर्वतीय राज्यों की आपदा संवेदनशीलता और वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड, हिमाचल और अन्य पर्वतीय राज्यों में आपदा जोखिम लगातार बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, क्लाउडबर्स्ट और भूस्खलन जैसे खतरे विज्ञान आधारित आपदा प्रबंधन को और महत्वपूर्ण बना रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में देहरादून में आयोजित यह वैश्विक सम्मेलन विशेष महत्व रखता है।
आधिकारिक जानकारी
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पर्वतीय राज्यों की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तराखंड इस सम्मेलन के लिए सबसे उपयुक्त स्थल है।
उन्होंने बताया कि:
- राज्य में नए रडार और वेदर स्टेशन लगाए जा रहे हैं
- नाउकास्ट सिस्टम के माध्यम से हर 3 घंटे में मौसम पूर्वानुमान जारी
- हरिद्वार, पंतनगर और औली में अत्याधुनिक रडार स्थापित किए जाएंगे
उन्होंने सिलक्यारा सुरंग रेस्क्यू का उल्लेख करते हुए कहा कि वैज्ञानिक दक्षता और मजबूत नेतृत्व किसी भी कठिन आपदा का सामना कर सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री की घोषणाओं के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि आपदा, जलवायु परिवर्तन और भूस्खलन पर विचार-विमर्श करेंगे। सीएम ने घोषणा की कि सिलक्यारा रेस्क्यू के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे “सिलक्यारा विजय दिवस” के रूप में मनाया जाएगा।
सम्मेलन में NDMA के सदस्य दिनेश कुमार असवाल की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री के मुख्य बिंदु
सीएम धामी ने कहा कि—
- विज्ञान, अनुसंधान और तकनीक आधारित नवाचार आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाते हैं
- हिमालय केवल पर्वतमाला नहीं, बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन स्रोत है
- बदलते मौसम पैटर्न, अधिक वर्षा और क्लाउडबर्स्ट नई चुनौतियाँ लेकर आए हैं
- वैज्ञानिक संस्थानों और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है
उन्होंने बताया कि राज्य में कई महत्वपूर्ण पहल चल रही हैं:
- Digital Monitoring System
- Glacier Research Center
- Drone Surveillance और GIS Mapping
- Satellite Monitoring
- ऊँचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर आधारित झील मॉनिटरिंग
- Early Warning System को सुदृढ़ करना
- हरित ऊर्जा और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना
सीएम ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला वैज्ञानिकों को सम्मानित भी किया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सम्मेलन उत्तराखंड के लिए एक बड़ा अवसर है। कई विद्यार्थियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सीखने का मौका प्रदेश के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण होगा।
विशेषज्ञ टिप्पणी
आपदा विशेषज्ञों का मानना है कि रडार, नाउकास्टिंग और AI आधारित चेतावनी प्रणाली पर्वतीय राज्यों में जानमाल की हानि कम करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
आगे क्या?
अगले सत्रों में जलवायु परिवर्तन, भूकंप जोखिम, ग्लेशियर विघटन, शहरी आपदा तैयारी और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत चर्चा होगी। सम्मेलन के बाद राज्य सरकार आपदा प्रबंधन ढांचे को और मजबूत करने के लिए नई रणनीति लागू कर सकती है।







