
देहरादून: प्रदेश में समान नागरिक संहिता के तहत विवाह पंजीकरण को लेकर दी गई छूट और बढ़ाई गई समय-सीमा अब समाप्त हो गई है। इसका सीधा अर्थ है कि अब विवाह पंजीकरण नियत समय सीमा के भीतर कराना अनिवार्य होगा। तय अवधि में पंजीकरण नहीं कराने पर शासन द्वारा निर्धारित विलंब शुल्क लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में छूट बढ़ाने का कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है, इसलिए अब नियमों के अनुसार ही व्यवस्था लागू रहेगी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
प्रदेश में समान नागरिक संहिता 27 जनवरी 2025 को लागू की गई थी। इसके अंतर्गत विवाह पंजीकरण, विवाह-विच्छेद और वसीयत के पंजीकरण से जुड़े शुल्क और विलंब शुल्क तय किए गए थे। नियमों के अनुसार 26 मार्च 2010 से अब तक हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
शुरुआत में आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से सरकार ने दो बार छह-छह माह की छूट दी थी। इस दौरान 26 जनवरी 2026 तक विवाह पंजीकरण निशुल्क रखा गया और विलंब शुल्क भी एक वर्ष के लिए स्थगित किया गया। अब समान नागरिक संहिता लागू हुए एक वर्ष की अवधि पूरी हो चुकी है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
गृह विभाग के सचिव शैलेश बगौली ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता के तहत फिलहाल किसी नई छूट का आदेश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे में नियमानुसार तय व्यवस्था प्रभावी रहेगी और विवाह पंजीकरण में देरी पर निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआती छूट के बाद अब नियमों को सख्ती से लागू किया जाना अपेक्षित था। कई नागरिकों ने यह भी कहा कि स्पष्ट समय-सीमा और शुल्क व्यवस्था से भ्रम की स्थिति खत्म होगी, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में जागरूकता अभियान अभी भी जरूरी है।
आंकड़े और तथ्य
समान नागरिक संहिता के तहत विवाह पंजीकरण के लिए शुल्क इस प्रकार तय किए गए हैं—
विवाह पंजीकरण शुल्क 250 रुपये रखा गया है।
तत्काल विवाह पंजीकरण के लिए 2500 रुपये का शुल्क निर्धारित है।
विलंब पंजीकरण पर 200 रुपये शुल्क लगेगा।
90 दिनों से अधिक देरी होने पर 300 रुपये का विलंब शुल्क लिया जाएगा।
विलंब शुल्क की गणना तीन माह की अवधि को एक मानते हुए की जाएगी और कुल शुल्क अधिकतम 10 हजार रुपये तक हो सकता है।
आगे क्या होगा
सरकार की ओर से संकेत साफ हैं कि आगे विवाह पंजीकरण को लेकर किसी अतिरिक्त राहत की संभावना फिलहाल नहीं है। ऐसे में नवविवाहितों और पहले से विवाह कर चुके दंपतियों को तय समय के भीतर पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है, ताकि अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचा जा सके।
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