
रुड़की: रुड़की ब्लॉक स्थित पशु चिकित्सालय में इन दिनों हरिद्वार, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से बड़ी संख्या में लोग अपने पालतू कुत्ते और बिल्लियों को इलाज के लिए ला रहे हैं। मंगलवार को कई मामलों में टिक फीवर की पुष्टि हुई, जो पालतू जानवरों के फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पशु चिकित्सक टीकाकरण और नियमित सफाई की सलाह दे रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के दिनों में पालतू जानवरों में टिक फीवर के मामलों में तेजी आई है। यह संक्रमण गंभीर स्थिति में फेफड़ों, खून और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर इलाज न मिलने पर उल्टी, दस्त और भूख न लगने जैसे लक्षण बढ़कर जानलेवा भी हो सकते हैं। क्षेत्र में पिछले कुछ सप्ताह से टिक की संख्या बढ़ने के कारण मामलों में उछाल देखा जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
रुड़की ब्लॉक के पशु चिकित्सक डॉ. रोहित सिंह ने बताया कि मंगलवार को छह से अधिक कुत्तों और बिल्लियों का इलाज किया गया।
उन्होंने बताया, “कई जानवरों को दवा दी गई है और गंभीर लक्षण वाले दो–तीन मरीजों को ग्लूकोज भी चढ़ाना पड़ा। टिक फीवर बहुत तेजी से फेफड़ों को प्रभावित करता है, इसलिए समय पर जांच जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण और सफाई से इस संक्रमण से बचाव संभव है।
पालतू जानवरों में सुस्ती और भूख न लगने जैसे लक्षण बढ़े
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल में उनके पालतू जानवरों में सुस्ती और भूख न लगने जैसे लक्षण बढ़े हैं, जिससे उन्हें अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है। पशु चिकित्सालय पहुंचे एक व्यक्ति ने बताया कि सहारनपुर से अपना कुत्ता लाने पर डॉक्टरों ने बताया कि टिक फीवर से उसके फेफड़े प्रभावित हो चुके हैं।
लक्षणों की जानकारी
- सुस्ती और कमजोरी
- भूख न लगना
- मसूड़ों और नाक से खून आना
- पीले मसूड़े (एनीमिया)
- सूजी हुई लिम्फ नोड्स
- जोड़ों में सूजन या लंगड़ापन
- अचानक वजन कम होना
- गहरे रंग का मूत्र
संक्रमण से बचाव के उपाय
- पालतू जानवरों के बालों की नियमित जांच
- टिक हटाने वाले शैंपू और स्प्रे का उपयोग
- घर और बगीचे की सफाई
- समय-समय पर पशु चिकित्सक से सलाह
आगे क्या?
पशु चिकित्सालय ने लोगों से अपील की है कि पालतू जानवरों में शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं। विभाग अगले कुछ दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है, ताकि टिक संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।







