
पौड़ी: विकासखंड के थनुर गांव में पिछले पांच दिनों से पेयजल आपूर्ति ठप है। स्थिति यह है कि करीब 30 परिवारों को रोजाना दो किलोमीटर दूर स्थित स्रोतों से सिर पर पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जल संस्थान को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
थानूर गांव और आसपास के क्षेत्रों के लिए कस्याली पेयजल पंपिंग योजना मुख्य स्रोत है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से इस योजना का विस्तार किया गया था। हर घर नल योजना शुरू होने से ग्रामीणों में उम्मीद थी कि पेयजल आपूर्ति और बेहतर होगी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में यह योजना ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
आधिकारिक जानकारी
ग्रामीणों का कहना है कि हर घर नल के लिए नई लाइनों को जोड़ते समय कई जगहों पर पुराने जर्जर पाइपों पर ही कनेक्शन जोड़ दिए गए। इससे लाइन क्षतिग्रस्त हुई और कस्याली पंपिंग योजना का पानी गांव तक पहुंचना बंद हो गया।
जल संस्थान पौड़ी के अधीक्षण अभियंता प्रवीण सैनी ने स्वीकार किया कि थानूर गांव से पेयजल आपूर्ति बाधित होने की शिकायत मिली है। उन्होंने बताया कि सहायक अभियंता को मौके पर भेजा जा रहा है और जल्द ही आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीण युगल किशोर बडोला, आलोक बिष्ट, रविराज बिष्ट, राकेश बिष्ट और अन्य लोगों ने बताया कि पूरा गांव पानी की कमी से जूझ रहा है। कई ग्रामीणों का कहना है कि नई जल लाइन बिछाने के दौरान मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण मौजूदा लाइनों को नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों ने बताया कि पांच दिनों से पानी न मिलने की वजह से बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
थानूर गांव की महिलाओं ने कहा कि रोजाना सिर पर दो किलोमीटर का सफर तय कर पानी लाना बेहद कठिन हो गया है, खासकर ठंड के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है।
आंकड़े और तथ्य
ग्रामीणों के अनुसार कस्याली पंपिंग योजना 12 गांवों की पेयजल जरूरतों को पूरा करती है। इस योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लगभग तीन करोड़ की लागत से हो रहे निर्माण कार्य के बीच पेयजल आपूर्ति बाधित होना ग्रामीणों में नाराजगी का कारण बना हुआ है।
आगे क्या?
जल संस्थान ने आश्वासन दिया है कि क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत जल्द की जाएगी और आपूर्ति बहाल की जाएगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। विभाग के अनुसार जांच रिपोर्ट आने के बाद ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।







