
देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन स्थल के रूप में तेजी से पहचान बना रही टिहरी झील में अब एक नई गतिविधि जुड़ने की संभावना है। यहां बहुप्रतीक्षित सी-प्लेन संचालन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। हवाई सेवा का संचालन करने वाली कंपनी स्काई हाक ने टिहरी झील में सी-प्लेन उतारने और उड़ाने में रुचि दिखाई है। इसके बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास परिषद ने आवश्यक जानकारियां कंपनी को उपलब्ध करा दी हैं। परिस्थितियों को देखते हुए यहां जल्द ट्रायल रन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
टिहरी झील में सी-प्लेन उतारने की कवायद पिछले करीब सात वर्षों से चल रही है। इससे पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने देश के 17 वाटर एयरोड्रोम में टिहरी झील को शामिल किया था। वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार और एएआई के बीच यहां वाटर एयरोड्रोम विकसित करने को लेकर करार भी हुआ था, लेकिन यह योजना उस समय आगे नहीं बढ़ पाई।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास परिषद ने टिहरी झील में सी-प्लेन लैंडिंग से जुड़ी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जानकारियां संबंधित कंपनी को सौंप दी हैं। यूकाडा की ओर से झील में वाटर एयरोड्रोम के लिए स्थान पहले ही चिह्नित किया जा चुका है और इनलैंड वाटर वेसल पॉलिसी के तहत सुरक्षा मानकों पर भी काम किया गया है।
यूकाडा के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार ने कुछ अतिरिक्त जानकारियां मांगी थीं, जिन्हें उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टिहरी झील में जल्द ही सी-प्लेन का ट्रायल रन शुरू हो सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि सी-प्लेन सेवा शुरू होने से टिहरी झील को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
आगे क्या होगा
यूकाडा की ओर से केंद्र को पांच झीलों पर सी-प्लेन सर्किट बनाने का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है। अब निजी हवाई कंपनी की रुचि के बाद टिहरी झील से इस योजना की शुरुआत होने की उम्मीद बढ़ गई है। ट्रायल रन सफल रहने पर नियमित संचालन की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।
सी-प्लेन क्या होता है
सी-प्लेन एक विशेष प्रकार का विमान होता है, जिसे उड़ान भरने और उतरने के लिए रनवे की आवश्यकता नहीं होती। यह विमान पानी की सतह से टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकता है। इसका उपयोग पर्यटन के साथ-साथ आपातकालीन राहत और बचाव कार्यों में भी किया जाता है।
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