
घनसाली: टिहरी जिले के पिलखी अस्पताल में प्रसव के बाद हुई रवीना कठैत की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। शनिवार को घनसाली क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने पिलखी अस्पताल के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था के खिलाफ विरोध
धरना स्थल पर प्रदर्शन का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता संदीप आर्य ने किया। इस दौरान कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी धरने में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि पहाड़ों के अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, उपकरणों की अनुपलब्धता और प्रसूति सेवाओं की बदहाल स्थिति अब असहनीय हो चुकी है। उन्होंने मांग की कि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए।
सीएमओ ने दी जांच और कार्रवाई का आश्वासन
धरना स्थल पर पहुंचे टिहरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. श्याम विजय ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विभागीय जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, डॉ. विजय के बयान —
“अगर रवीना अपनी चिकित्सकीय जानकारी डॉक्टरों को पहले दे देती, तो शायद आज वह हमारे बीच होती”
ने उपस्थित लोगों में रोष पैदा कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मरीज की स्थिति को समझना और उचित उपचार देना डॉक्टरों की जिम्मेदारी है, न कि उसकी कमी का ठीकरा मरीज पर फोड़ा जाए।
स्थानीय लोगों का ऐलान — “कार्रवाई तक जारी रहेगा धरना”
स्थानीय निवासियों ने कहा कि जब तक लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई नहीं होती और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह धरना जारी रहेगा।
पूरा मामला जानिए
ग्राम पंचायत सेम बासर निवासी रवीना कठैत (22) पत्नी कुलदीप कठैत को गुरुवार सुबह 6 बजे प्रसव पीड़ा हुई थी। परिवारजन उन्हें पीएचसी पिलखी ले गए, जहाँ सुबह 8 बजे बच्चे का जन्म हुआ। देर शाम को महिला को सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे श्रीनगर बेस अस्पताल रेफर किया।
शुक्रवार को उपचार के दौरान महिला की मृत्यु हो गई।
रवीना के पति, जो होटल में कार्यरत हैं, ने आरोप लगाया कि रात को कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था, केवल वार्ड ब्वाय ड्यूटी पर था। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट चिकित्सकीय लापरवाही का मामला है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गौरतलब है कि इसी अस्पताल में 6 सितंबर को एक अन्य महिला की डिलीवरी के बाद 15 सितंबर को मृत्यु हो चुकी है, जिससे अस्पताल प्रशासन पर पहले से सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारी का बयान
सीएमओ टिहरी, डॉ. श्याम विजय ने बताया —
“महिला की केस हिस्ट्री से पता चला है कि उसे पहले से हृदय संबंधी बीमारी थी और उसकी बाईपास हार्ट सर्जरी हो चुकी थी। परिजनों ने इसकी जानकारी अस्पताल को नहीं दी थी। प्रसव सामान्य था, लेकिन 24 घंटे बाद सांस लेने में परेशानी हुई। महिला को ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ 108 एंबुलेंस से श्रीनगर बेस अस्पताल भेजा गया, जहाँ उसकी मृत्यु हो गई।”
रवीना कठैत की मौत ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों की खराब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएँ यह सवाल उठाती हैं कि क्या उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा का अधिकार मिल पा रहा है?






