हरिद्वार: बहादराबाद थाने में दर्ज रिपोर्ट के मामले में हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद पूर्व विधायक सुरेश राठौर बृहस्पतिवार को हरिद्वार लौट आए। ज्वालापुर स्थित अपने आवास पर पहुंचकर उन्होंने मीडिया से बातचीत में खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वे न्याय को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। राठौर ने स्पष्ट किया कि सच्चाई सामने आने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी और वे किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
27 दिसंबर को बहादराबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पूर्व विधायक सुरेश राठौर करीब 11 दिनों तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे। इस दौरान मामला राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा। हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद वे पहली बार हरिद्वार लौटे और अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखी।
आधिकारिक जानकारी
पूर्व विधायक ने बताया कि उन्हें न्यायालय से अंतरिम राहत मिली है और अब वे कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की लड़ाई लड़ेंगे। इस प्रकरण पर प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला लगातार सुर्खियों में रहने के कारण क्षेत्र का माहौल प्रभावित हुआ है। लोगों की राय है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और अनावश्यक विवाद समाप्त हो।
अपने बयान में क्या बोले राठौर
सुरेश राठौर ने कहा कि जब तक उन्हें पूरी तरह न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे भगवा वस्त्र धारण नहीं करेंगे। उन्होंने इसे अपनी निजी आस्था और संकल्प बताया। अंकिता भंडारी प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए राठौर ने कहा कि समाज और प्रदेश का माहौल जानबूझकर बिगाड़ा गया और जनभावनाओं का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उर्मिला के कारण स्थिति बिगड़ी और कांग्रेस ने इस मामले को राजनीतिक रंग दिया।
साजिश का आरोप और ऑडियो पर सवाल
पूर्व विधायक ने दावा किया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उनके साथियों को भी रिपोर्ट में घसीटने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि रविदास पीठ की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण है। वायरल ऑडियो को लेकर राठौर ने कहा कि तकनीक के इस दौर में एआई के माध्यम से आवाज तैयार करना संभव है, इसलिए ऑडियो की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
आगे क्या होगा
पूर्व विधायक के अनुसार वे कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखते हैं और आगे भी न्यायालय के निर्देशों का पालन करेंगे। अब मामले में अगली सुनवाई और जांच के निष्कर्ष पर सबकी नजरें टिकी हैं।
