
काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले में शुक्रवार 16 जनवरी को उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायालय ने इस प्रकरण में नामजद आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार और मृतक के भाई एवं शिकायतकर्ता परमिंदर को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर आपत्तियां दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से जांच में सहयोग करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तिथि तय की है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह मामला शनिवार देर रात नैनीताल जिले के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह द्वारा आत्महत्या किए जाने से जुड़ा है। आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जिनमें कुछ पुलिस अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे। घटना के बाद यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।
आधिकारिक जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी निगरानी डीजीपी स्तर पर की जा रही है और जांच एसआईटी को सौंपी गई है, हालांकि जांच प्रक्रिया अभी प्रारंभ नहीं हुई है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता दोनों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
मामले का विवरण
मृतक सुखवंत सिंह ने वीडियो में आरोप लगाया था कि जमीन के सौदे में उनके साथ धोखाधड़ी हुई और उनसे करीब चार करोड़ रुपये ठगे गए। उन्होंने यह भी कहा था कि शिकायत करने पर उन्हें कथित तौर पर डराया-धमकाया गया।
इसके बाद मृतक के भाई परमिंदर की तहरीर पर काशीपुर के आईटीआई थाने में 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उनका इस प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उनका तर्क था कि मामला दो पक्षों के बीच जमीन से जुड़ा विवाद है और आत्महत्या की घटना के आधार पर उनकी गिरफ्तारी अनुचित होगी। उन्होंने दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक की मांग की।
संख्या / तथ्य
इस मामले में कुल 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में आपत्तियां दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
आगे क्या होगा
न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की आपत्तियां दाखिल होने के बाद अगली सुनवाई में मामले की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। तब तक नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी और एसआईटी जांच की प्रगति भी अदालत के संज्ञान में लाई जा सकती है।





