
नई टिहरी: श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में शिक्षकों को समय पर वेतन और पारिश्रमिक बिलों का भुगतान न होने पर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (सूटा) ने गंभीर नाराजगी जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय स्तर पर भुगतान प्रक्रियाओं को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है, जिससे शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के वर्षों में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर असंतोष लगातार सामने आता रहा है। समय पर वेतन न मिलना, बीते वर्षों से पारिश्रमिक बिल लंबित रहना और जीपीएफ जमा न होने की विसंगतियाँ, शिक्षक समुदाय में गहरे असंतोष का कारण बन गई हैं।
औपचारिक जानकारी
पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर में आयोजित बैठक में सूटा के सदस्यों ने वेतन और पारिश्रमिक बिलों के भुगतान में हो रही देरी पर कड़ा रोष व्यक्त किया। बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि यदि प्रत्येक माह की पहली तारीख को वेतन का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया जाता, तो माह की दूसरी तारीख से शिक्षक संघ विश्वविद्यालय के सभी प्रशासनिक और गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग हो जाएगा।
शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे कर्मचारी मौजूद हैं जो जानबूझकर बिलों की फाइलें लंबित रखते हैं। संघ ने इन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही जीपीएफ राशि हर माह महालेखाकार कार्यालय में जमा न होने से शिक्षकों के ब्याज में विसंगतियाँ आने की शिकायत भी उठाई गई।
ऋषिकेश परिसर के प्राध्यापकों ने मांग की कि भुगतान प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए सहायक कुलसचिव (वित्त) को सप्ताह के कुछ दिनों के लिए परिसर में तैनात किया जाए, ताकि बिलों का निस्तारण समय पर हो सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शिक्षकों का कहना है कि वेतन और बिलों की देरी से आर्थिक दबाव बढ़ गया है। कई सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को बार-बार अवगत कराने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की गई। स्थिति ऐसी है कि अब आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
आगे क्या?
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल प्रभाव से भुगतान प्रक्रिया दुरुस्त नहीं करता, तो शिक्षक संगठन आंदोलनात्मक कदम उठाएगा। आने वाले दिनों में जिले और विश्वविद्यालय मुख्यालय स्तर पर इस मामले को लेकर गतिविधियाँ तेज होने की संभावना है। प्रशासन की ओर से अभी इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।






