
देहरादून: उत्तराखंड में बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य तेजी पकड़ चुका है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में अब तक कुल 3,30,295 उपभोक्ताओं के पारंपरिक मीटर बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। यूपीसीएल के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य बिजली उपभोग की रियल टाइम मॉनिटरिंग, लॉस में कमी और बिलिंग की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
गढ़वाल और कुमाऊं में प्रगति
- गढ़वाल मंडल में कुल 9,62,035 उपभोक्ताओं में से 1,46,183 उपभोक्ताओं को अब तक स्मार्ट मीटर की सुविधा मिल चुकी है।
- इनमें देहरादून दक्षिण विद्युत वितरण खंड में सबसे अधिक 32,606 मीटर लगाए गए हैं।
- वहीं कुमाऊं मंडल के 6,25,833 उपभोक्ताओं में से 1,84,112 मीटर बदले जा चुके हैं।
- इसमें काशीपुर वितरण खंड (उधम सिंह नगर) में सबसे अधिक 25,874 उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की सुविधा दी गई है।
इस प्रकार दोनों मंडलों में अब तक कुल 3,30,295 उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से जुड़ चुके हैं।
प्रमुख जिलों में तेजी से चल रहा कार्य
ऊर्जा निगम के अनुसार, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिलों में सभी उपभोक्ताओं के मीटर स्मार्ट मीटर से बदले जाने की तैयारी की जा रही है। साथ ही देहरादून और नैनीताल जिलों के मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों के नगरपालिका क्षेत्रों में भी यह कार्य जारी है। आगामी चरण में शेष नौ जिलों के शहरी इलाकों में भी सभी मीटर बदले जाएंगे।
पंचायत क्षेत्रों में दूसरे चरण में योजना
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक (MD) अनिल यादव ने बताया कि पंचायत क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना द्वितीय चरण में लागू की जाएगी। उन्होंने कहा,
“स्मार्ट मीटर प्रणाली से बिजली उपभोग की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। इससे विद्युत लॉस में कमी आएगी और बिलिंग प्रणाली और अधिक पारदर्शी बनेगी।”
उपभोक्ताओं को नहीं देना होगा कोई शुल्क
यूपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बदलने के लिए उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि किसी उपभोक्ता को बिजली बिल को लेकर शिकायत होती है, तो विभाग द्वारा उसका तत्काल निस्तारण किया जाता है। इसके अलावा ज्यादा बिल आने की स्थिति में “चेक मीटर” की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है ताकि उपभोक्ता स्वयं खपत का सत्यापन कर सकें।
तकनीकी लाभ
स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को मिलेंगे ये प्रमुख फायदे:
- बिजली उपयोग की रियल टाइम जानकारी मोबाइल ऐप के जरिए मिलेगी।
- मीटर रीडिंग और बिलिंग में मानवीय त्रुटियां खत्म होंगी।
- बिजली चोरी और तकनीकी लॉस पर काबू पाया जा सकेगा।
- उपभोक्ता अपने उपयोग और खर्च को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकेंगे।





