
रुद्रप्रयाग: बदरीनाथ हाईवे पर पिछले चार दशकों से सिरदर्द बने सिरोबगड़ लैंडस्लाइड जोन के स्थायी समाधान की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। टीएचडीसी ने एसटीपी टेस्टिंग के बाद इस क्षेत्र के ट्रीटमेंट की डीपीआर तैयार कर ली है, वहीं कलियासौड़-खांखरा बाईपास का अधूरा निर्माण कार्य भी फिर से शुरू हो गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से चारधाम यात्रा और स्थानीय यातायात दोनों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बदरीनाथ हाईवे पर रुद्रप्रयाग और श्रीनगर के बीच स्थित सिरोबगड़ क्षेत्र 1970 के दशक से भूस्खलन की गंभीर समस्या झेल रहा है। हर बरसात में यह क्षेत्र यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा बन जाता है। अब तक यहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिल पाया। सिरोबगड़ को चारधाम यात्रा मार्ग का “सबसे खतरनाक लैंडस्लाइड जोन” कहा जाता है।
डीपीआर तैयार, स्थायी समाधान की दिशा में कदम
राष्ट्रीय राजमार्ग खंड (लोनिवि) के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडेय ने बताया कि टीएचडीसी ने सिरोबगड़ के लिए एसटीपी टेस्ट पूरा कर लिया है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी ट्रीटमेंट का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रीटमेंट कार्य जल्द शुरू होगा, जिससे चारधाम यात्रा के दौरान होने वाले जाम और दुर्घटनाओं से राहत मिलेगी।
कलियासौड़–खांखरा बाईपास को मिली रफ्तार
चारधाम परियोजना के तहत 3.5 किमी लंबे कलियासौड़–खांखरा बाईपास का निर्माण वर्ष 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन तकनीकी कारणों से यह छह साल से अधर में लटका हुआ था। अब कार्य फिर से शुरू हो गया है। पहले पुल का निर्माण लगभग 90% पूरा हो चुका है, जबकि अन्य दो पुलों के एबटमेंट कार्य जारी हैं। ढाई किलोमीटर सड़क कटिंग भी पूरी हो चुकी है। विभाग के अनुसार, मार्च 2026 तक पहला पुल आवागमन के लिए तैयार हो जाएगा और बाईपास अगले डेढ़ से दो सालों में पूर्ण हो जाएगा।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
पूर्व प्रधान विमल चौहान ने कहा, “तकनीकी खामियों और लापरवाही के कारण छह सालों से बाईपास निर्माण अधर में था। सिरोबगड़ की समस्या का स्थायी समाधान केवल बाईपास निर्माण ही है। अब जब कार्य शुरू हुआ है, उम्मीद है कि जल्द राहत मिलेगी।”
उन्होंने कहा कि 150 करोड़ की लागत से बन रही इस परियोजना पर निरंतर निगरानी जरूरी है ताकि कार्य में देरी न हो।
वैज्ञानिक और शोध पहल
जानकारी के अनुसार, सिरोबगड़ लैंडस्लाइड जोन पर अब तक चार शोधार्थियों ने पीएचडी की है। यह जोन दशकों से भूगर्भीय अध्ययन और इंजीनियरिंग शोध का केंद्र रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र जलधारा, मिट्टी के ढांचे और वर्षा के प्रभाव से अत्यधिक संवेदनशील है, जिसके चलते हर वर्ष भूस्खलन की घटनाएं दोहराई जाती हैं।
प्रशासन की टिप्पणी
अधिशासी अभियंता ओंकार पांडेय ने बताया कि “सिरोबगड़ का ट्रीटमेंट और बाईपास निर्माण कार्य दोनों समानांतर रूप से चलेंगे। बाईपास बनने से खांखरा बाजार या स्थानीय व्यापार को कोई नुकसान नहीं होगा। दोनों मार्ग खुले रहेंगे जिससे यातायात पर असर नहीं पड़ेगा।”
आगे क्या
ट्रीटमेंट और बाईपास परियोजना के पूरा होने से बदरीनाथ हाईवे पर जाम की समस्या खत्म होने की उम्मीद है। इसके साथ ही चारधाम यात्रा में आने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय जनता को बरसाती सीजन में भूस्खलन से बड़ी राहत मिलेगी।





