
चमोली जिले के सिमली क्षेत्र में गुरुवार को जिलासू की चंडिका देवी देवरा यात्रा का पारंपरिक स्वागत किया गया। गाजे-बाजे, फूल वर्षा और जयकारों के बीच यात्रा जब चंडिका मंदिर पहुँची तो दो बहनों के प्रतीकात्मक मिलन से श्रद्धालु खुशी से झूम उठे और मंदिर परिसर में भजन–कीर्तन की गूंज फैल गई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जिलासू की चंडिका देवी देवरा यात्रा क्षेत्र की प्राचीन लोक-परंपरा का हिस्सा है, जो विभिन्न गांवों से होकर सिमली पहुँचती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह यात्रा आस्था, संरक्षण और सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर देवी के दर्शन तथा पूजा-अर्चना करते हैं।
यात्रा का सिमली आगमन
गुरुवार को देवरा यात्रा जैसे ही सिमली के चंडिका मंदिर पहुँची, मंदिर परिसर देवी के जयकारों, ढोल-दमाऊ और जागरों की धुन से गूंज उठा। यात्रा के आगमन पर श्रद्धालुओं ने देवी का फूल-पुष्पों से स्वागत किया।
पुजारी कृष्णा गैरोला और प्रदीप गैरोला के नेतृत्व में मंदिर में वैदिक पूजा-अर्चना हुई। स्थानीय श्रद्धालु, भक्त और ध्यानियों ने मिलकर देवी की विदाई की रस्में पूरी कीं।
सांस्कृतिक महत्व और स्थानीय उत्साह
देवरा यात्रा का सिमली पहुँचना दो बहनों के पवित्र प्रतीकात्मक मिलन के रूप में माना जाता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस आयोजन से गांवों में एकता, समृद्धि और देव आशीर्वाद का संदेश मिलता है।
चंडिका मंदिर परिसर में भक्तों ने जागर, कीर्तन और भजन गाकर आध्यात्मिक वातावरण को और दिव्य बना दिया। कई महिलाएँ और बुजुर्ग पूरे समय मंदिर परिसर में मौजूद रहे और श्रद्धा के साथ अनुष्ठान संपन्न किया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
समिति अध्यक्ष दिलबर सिंह चौहान, पुजारी संतोष तिवारी, द्वारिका प्रसाद तिवारी, संदीप चौहान और ईश्वर राणा ने बताया कि— “देवी के प्रति लोगों में अपार आस्था है। हर गांव में पारंपरिक तरीके से यात्रा का स्वागत किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की संपूर्ण भागीदारी से यात्रा का उत्साह कई गुना बढ़ जाता है।”
स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि देवरा यात्रा क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे पीढ़ियों से संजोया गया है।
आगे क्या
चंडिका देवी देवरा यात्रा सिमली बाजार और औद्योगिक क्षेत्र का भ्रमण करने के बाद रात्रि प्रवास हेतु सिमली गांव पहुँची। यात्रा अगले दिनों में निर्धारित मार्गों से होते हुए आगे बढ़ेगी।







