
चमोली: उत्तराखंड के प्रसिद्ध विंटर डेस्टिनेशन औली की बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यटन कारोबारियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। औली की दिशा और दशा सुधारने के उद्देश्य से ‘औली बचाओ’ आंदोलन की शुरुआत की गई है। चेयर लिफ्ट प्वाइंट के पास रैली निकालकर प्रदर्शनकारियों ने व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की और प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपये के उपकरण खराब हो चुके हैं, जिससे साहसिक और शीतकालीन पर्यटन प्रभावित हुआ है और औली अपनी पहचान खोता जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
औली कभी देश-विदेश में शीतकालीन खेलों और बर्फीले नजारों के लिए जाना जाता था। प्राकृतिक बर्फबारी कम होने पर कृत्रिम बर्फ प्रणाली को विकल्प के तौर पर स्थापित किया गया था, लेकिन समय के साथ इन संसाधनों का रखरखाव नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप, पर्यटन गतिविधियां सीमित हुईं और स्थानीय आजीविका पर सीधा असर पड़ा।
आंदोलन की शुरुआत और मांगें
प्रदर्शनकारियों ने औली चेयर लिफ्ट प्वाइंट के पास एकजुट होकर ‘औली बचाओ’ रैली निकाली। उनका आरोप है कि वर्ष 2010–11 में स्थापित कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनें आज जंग खा रही हैं। करोड़ों की लागत से लगाए गए यूरोपीय उपकरण और विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर अनुपयोगी हो चुके हैं। इसके अलावा, लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से बनी ओपन आइस स्केटिंग रिंक भी वर्षों से वीरान पड़ी है।
पर्यटन कारोबारियों की बात
स्थानीय पर्यटन हितधारकों का कहना है कि जब तक कृत्रिम बर्फ प्रणाली और ओपन आइस स्केटिंग रिंक को फिर से शुरू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका तर्क है कि साहसिक और शीतकालीन गतिविधियां ठप होने से पर्यटक नहीं आ रहे हैं, जिससे होटल, टैक्सी, गाइड और छोटे कारोबारों को भारी नुकसान हो रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय युवाओं और निवासियों का कहना है कि औली को केवल प्रचार सामग्री और तस्वीरों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।उनके अनुसार, यदि जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाएं बहाल नहीं की गईं तो औली का पर्यटन भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
आंकड़े / तथ्य
कृत्रिम बर्फ प्रणाली को करीब 15 वर्ष पहले स्थापित किया गया था। ओपन आइस स्केटिंग रिंक पर लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च बताए जा रहे हैं। आधुनिक साहसिक उपकरणों पर करोड़ों रुपये की लागत आई थी।
आगे क्या होगा
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर क्रमिक अनशन सहित आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वे सरकार और संबंधित एजेंसियों से शीघ्र हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि औली में शीतकालीन पर्यटन को पुनर्जीवित किया जा सके और स्थानीय आजीविका सुरक्षित हो।






