
साहिया: जौनसार-बावर क्षेत्र के साहिया में उस समय खास माहौल देखने को मिला, जब आयुर्वेद विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के महासचिव आचार्य बालकृष्ण पारंपरिक जूडौ पहनकर लोकनृत्य में शामिल हुए। आमतौर पर सफेद वस्त्रों में दिखने वाले आचार्य बालकृष्ण का यह अलग रूप लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। लोकनृत्य के दौरान वे स्थानीय लोगों के साथ झूमते नजर आए, जिससे कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों का उत्साह और बढ़ गया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेद, योग और वेदों के गहन ज्ञाता माने जाते हैं। उन्होंने हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ को स्वामी रामदेव के साथ मिलकर वैश्विक पहचान दिलाई। आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों पर उनके शोध, पुस्तकों और उत्पादों के माध्यम से लाखों लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिला है। साहिया में उनका यह सांस्कृतिक सहभाग स्थानीय परंपराओं के प्रति सम्मान और जुड़ाव को दर्शाता है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
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स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि आचार्य बालकृष्ण का पारंपरिक लोकनृत्य में शामिल होना जौनसार की सांस्कृतिक पहचान के लिए गौरव का क्षण है। साहिया पहुंचने पर उनका पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया और कार्यक्रम के दौरान लोग उत्साहित नजर आए।
आगे क्या होगा
आयोजकों के अनुसार, इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जौनसार-बावर की लोकपरंपराओं को नई पहचान मिलती है और युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ती है।







