
रुद्रप्रयाग: अरुणाचल प्रदेश में मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए रुद्रप्रयाग के हवलदार रविंद्र सिंह को मंगलवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अलकनंदा–मंदाकिनी संगम पर हुए अंतिम संस्कार में उनके बड़े भाई दिगंबर राणा और छोटे भाई राहुल राणा ने मुखाग्नि दी। गांव से लेकर संगम तक ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद रविंद्र सिंह अमर रहें’ के नारों के बीच जनसैलाब उमड़ा। यह विदाई केवल एक सैनिक की नहीं, बल्कि एक ऐसे सपूत की थी, जिसने देश सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
36 वर्षीय हवलदार रविंद्र सिंह रुद्रप्रयाग जिले के आगर गांव (दशज्यूला) के निवासी थे। वे 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे और वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश के अलोंग क्षेत्र में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। 18 जनवरी को ड्यूटी के दौरान उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया, जिससे उनका निधन हो गया। उनकी शहादत की खबर से पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
आधिकारिक जानकारी
शहीद का पार्थिव शरीर 19 जनवरी की रात रुद्रप्रयाग स्थित आर्मी कैंप लाया गया, जहां सेना के अधिकारियों और जवानों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। 20 जनवरी की सुबह करीब सात बजे सैन्य टुकड़ी पूरे सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव आगर (दशज्यूला) लेकर पहुंची। इसके बाद अलकनंदा–मंदाकिनी संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि रविंद्र सिंह गांव के लिए प्रेरणास्रोत थे और उनका सौम्य स्वभाव सभी को जोड़कर रखता था। ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम सलामी दी और कहा कि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
जनप्रतिनिधियों की संवेदना
अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल भी शामिल हुईं। उन्होंने शहीद के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने भगवान केदारनाथ से परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
आंकड़े / तथ्य
रविंद्र सिंह वर्ष 2008 में सेना में भर्ती हुए थे और 15 गढ़वाल राइफल्स में सेवा दे रहे थे। वे अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गए हैं। पूरे क्षेत्र में उनके परिवार के भविष्य को लेकर संवेदनाएं और सहयोग की भावना दिखाई दी।
आगे क्या होगा
शासन और सेना की ओर से शहीद के परिजनों को मिलने वाली सहायता और सम्मान संबंधी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। क्षेत्र में शहीद की स्मृति को सहेजने के लिए सामाजिक स्तर पर भी पहल की चर्चा है।







