
रुद्रप्रयाग: जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर दूर राइंका मयकोटी क्षेत्र के जंगलों में लगी आग ने बीते दो दिनों में लाखों की वन संपदा को राख में बदल दिया है। धुआं पूरे क्षेत्र में फैल गया है और वन्यजीव सुरक्षित स्थानों की तलाश में ग्रामीण और शहरी इलाकों की ओर भागने लगे हैं। आग की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता बताई जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में गर्मियों में जंगलों में आग लगना आम बात है, लेकिन दिसंबर जैसी ठंड में आग लगना पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। रुद्रप्रयाग के मयकोटी में लगातार दो दिनों से जंगल धधक रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय नुकसान बढ़ रहा है और धुआं दूर-दूर तक दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोग वन विभाग की सुस्ती पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आग के कारण वन्यजीव आवास छोड़कर मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ गया है।
आधिकारिक जानकारी
प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही विभागीय टीमों को मौके पर भेजा गया है। कई स्थानों पर पहुंचने में कठिनाई है, लेकिन विभाग आग बुझाने के हरसंभव प्रयास कर रहा है।
वन अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ी और घने जंगलों वाले क्षेत्रों में आग पर नियंत्रण पाना चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर जब हवा तेज हो जाए या रास्ते दुर्गम हों।
हालांकि, स्थानीय लोग वन विभाग की तत्परता पर सवाल उठा रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि सड़क किनारे लगी आग को भी सही समय पर नहीं बुझाया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
सामाजिक कार्यकर्ता दीपक बिष्ट ने कहा कि जंगलों में आग से वन्यजीवों के साथ-साथ पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है। उन्होंने बताया, “राइंका मयकोटी के जंगल पिछले दो दिनों से जल रहे हैं। वन विभाग मौके पर पहुंचने में देरी कर रहा है, जिससे आग फैलती जा रही है।”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि असामाजिक तत्व जानबूझकर जंगलों में आग लगा रहे हैं, जिसके कारण जंगली जानवर गांवों की ओर आकर आदमखोर व्यवहार भी दिखाने लगे हैं।
वाहन चालकों ने बताया कि सड़क किनारे धधक रही आग के कारण धुआं इतना बढ़ गया है कि कई बार दृश्यता बेहद कम हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।
आंकड़े और प्रभाव
आग से लाखों की वन संपदा क्षतिग्रस्त हुई है और बड़ी संख्या में वनस्पतियाँ व छोटे जीव जंतुओं का नुकसान हुआ है। क्षेत्र में उठता धुआं शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में हवा की गुणवत्ता पर असर डाल रहा है।
बीते वर्षों में भी रुद्रप्रयाग में कई स्थानों पर जंगल की आग की घटनाएँ सामने आई थीं, लेकिन इस बार दिसंबर में आग लगना इससे भी अधिक चिंताजनक माना जा रहा है।
आगे क्या?
वन विभाग की टीमें लगातार आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास कर रही हैं। विभाग ने कहा है कि कठिन क्षेत्रों में भी पहुंचने की कोशिश की जा रही है, ताकि आग फैलने से पहले इसे नियंत्रित किया जा सके।
पर्यावरणविदों ने सुझाव दिया है कि ऐसे क्षेत्रों में पहले से फायरलाइन तैयार की जाए और संवेदनशील गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है ताकि आग को फैलने से रोका जा सके और वन्यजीव–मानव संघर्ष की स्थिति और न बिगड़े।






