
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब जानलेवा रूप अख्तियार कर चुका है। रुद्रप्रयाग जिले के जोंदला ग्राम सभा स्थित पाली तोक में बुधवार सुबह एक गुलदार ने 55 साल के मनबर सिंह बिष्ट पर अचानक हमला बोल दिया। ग्रामीण अपनी गौशाला की ओर जा रहे थे, तभी जंगल से निकला यह खतरनाक शिकारी उन्हें घसीटकर ले गया, जहां उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत की लहर दौड़ा दी है, जबकि स्थानीय लोग वन विभाग की निष्क्रियता पर भड़के हुए हैं।
घटना का पूरा विवरण: सुबह 5 बजे का खूंखार वार
रुद्रप्रयाग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) रजत सुमन के अनुसार, घटना बुधवार तड़के करीब 5 बजे की है। मनबर सिंह बिष्ट घर से छानी (पशुशाला) जा रहे थे कि रास्ते में घात लगाए गुलदार ने उन पर झपट्टा मार दिया। शव की जांच में पुष्टि हुई कि गुलदार ने ग्रामीण को करीब 100 मीटर तक घसीटा, जिससे उनकी मौत हो गई। यह रुद्रप्रयाग जिले में इस साल गुलदार हमलों से होने वाली चौथी मौत है, जबकि करीब 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
पिछले मामलों में भी गुलदारों ने गांवों के आसपास हमले किए, लेकिन विभाग की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों की कटाई, शिकार की कमी और मानव अ encroachमेंट के कारण गुलदार गांवों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं, जिससे उनका व्यवहार आक्रामक हो गया है।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, लेकिन सवाल बरकरार
हमले की सूचना मिलते ही डीएफओ रजत सुमन और उपजिलाधिकारी भगत सिंह फोनिया की अगुवाई में टीम मौके पर पहुंची। जांच के बाद पीड़ित परिवार को तत्काल राहत स्वरूप 1 लाख 80 हजार रुपये का चेक सौंपा गया। गुलदार को ट्रैक करने के लिए ड्रोन सर्विलांस शुरू कर दिया गया है, साथ ही पिंजरे और ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, विभाग ने अब तक सिर्फ एक गुलदार को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर भेजा है। वर्तमान में इलाके में 4-5 गुलदार सक्रिय बताए जा रहे हैं। डीएफओ ने कहा, “हम लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं, लेकिन संघर्ष के मूल कारणों की गहन जांच जरूरी है।”
ग्रामीणों का आक्रोश: शूटिंग की मांग, विभाग पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद ग्रामीणों ने शव नहीं उठाने दिया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। मूल निवास भू कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने वन अधिकारियों से गुलदार को शूट करने की तत्काल अनुमति, स्कूलों के पास गश्त बढ़ाने, झाड़ियां साफ कराने और कर्मियों की तैनाती की मांग की। उन्होंने कहा, “देहरादून की सरकार चैन की नींद सो रही है, जबकि हमारे गांवों में गुलदार रोज शिकार कर रहे हैं। व्यवहार में बदलाव के कारण पता लगाएं, वरना ऐसी मौतें नहीं रुकेंगी।”
ग्रामीणों का कहना है कि महीनों से गुलदार की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं, लेकिन विभाग ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। वे चेतावनी दे रहे हैं कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होगी, विरोध जारी रहेगा।







