
रुद्रप्रयाग / श्रीनगर: रुद्रप्रयाग के कोट-मल्ला क्षेत्र में बुधवार सुबह गुलदार से महिलाओं को बचाने के साहसिक कार्य के लिए राज्य पुरस्कार पा चुके भरत सिंह चौधरी पर भालू ने जानलेवा हमला कर दिया। पानी खोलकर लौट रहे भरत सिंह ने पेड़ पर चढ़कर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन भालू भी पेड़ पर चढ़ आया और उनके पैरों पर गंभीर चोटें पहुंचाईं। ग्रामीणों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उन्हें श्रीनगर रेफर किया गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रुद्रप्रयाग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बीते कुछ समय से भालू और गुलदार के हमलों में बढ़ोतरी हुई है। भालू सुबह और शाम के समय बस्तियों के नजदीक आ रहे हैं। इससे ग्रामीणों में लगातार दहशत बनी हुई है।
कोट-मल्ला भी उन संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है, जहां पिछले कई महीनों से वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ी हैं।
घटना कैसे हुई
बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे फीटर भरत सिंह चौधरी पानी की लाइन खोलकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे भालू ने उन पर अचानक हमला कर दिया। जान बचाने के लिए भरत सिंह तेजी से पास के पेड़ पर चढ़ गए।
लेकिन भालू भी पेड़ पर चढ़ने लगा। खतरा देखते हुए भरत सिंह ने भालू को लात मारी। इस बीच भालू ने उनके पैरों को जबड़े में पकड़ लिया और गंभीर रूप से घायल कर दिया।
चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद भालू वहां से भाग गया। गंभीर हालत में उन्हें जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद श्रीनगर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना स्वयं इमरजेंसी में पहुंचे और भरत का हालचाल लिया। चिकित्सकीय टीम को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
भरत सिंह ने कहा कि रानीगढ़ पट्टी में गुलदार और भालू के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन वन विभाग की कार्रवाई केवल गश्त तक सीमित है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजाना डर के साए में जी रहे हैं और कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा रही है।
ग्रामीणों ने भी बताया कि क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियां इतनी बढ़ गई हैं कि सुबह-शाम घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। लोग प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
रुद्रप्रयाग प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने बताया कि जिले के लगभग 7 से 8 अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में 9 से 10 भालू सक्रिय हैं। वन विभाग जागरूकता शिविर आयोजित कर रहा है और ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव और लंबे समय तक बारिश होने से जंगली जानवरों के व्यवहार में भी परिवर्तन देखा जा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र चौधरी ने कहा कि पिछले 5–10 वर्षों में भालू और गुलदार की घटनाओं में तेजी आई है। उन्होंने वन विभाग से ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की।
भरत सिंह की पुरानी बहादुरी
भरत सिंह चौधरी का साहस नया नहीं है। वर्ष 1991 में उन्होंने घास लेने गई दो महिलाओं पर हमला करते गुलदार से भिड़कर उनकी जान बचाई थी। उनके इस कार्य के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत कल्याण सिंह ने उन्हें जीवन रक्षा पदक और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया था।
अगला कदम / आगे क्या
वन विभाग जल्द ही संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और ट्रैपिंग टीमों की तैनाती की योजना बना रहा है। ग्रामीणों को सुबह-शाम अकेले न निकलने और वन क्षेत्रों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र में स्थायी निगरानी तंत्र विकसित किया जाए ताकि ऐसे हमलों पर प्रभावी रोक लग सके।






