
रुद्रप्रयाग जिले के बांगर क्षेत्र में वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों का सब्र टूट गया है। बधाणी ताल से भुनाल गांव भेडारू तक प्रस्तावित 9 किलोमीटर सड़क को लेकर ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) कार्यालय में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। 3 नवंबर से चल रही इस भूख हड़ताल में तीन बुजुर्ग ग्रामीण शामिल हैं, जिनकी हालत भी बिगड़ने लगी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पूर्वी और पश्चिमी बांगर क्षेत्र के ग्रामीण पिछले 35 वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। राज्य निर्माण से पहले वर्ष 1991 में आंदोलन शुरू हुआ था, लेकिन आज तक सड़क नहीं बन सकी। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद काम की शुरुआत तक नहीं हुई।
लंबे इंतज़ार का दर्द
राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के जश्न के बीच, ये ग्रामीण 9 किलोमीटर सड़क के लिए भूख हड़ताल पर बैठे हैं। सड़क न होने से बीमारों और गर्भवती महिलाओं को अब भी पालकी से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
घुमावदार रास्तों से होती है मुश्किल यात्रा
जखोली ब्लॉक के पहाड़ी इलाकों में स्थित इन गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को 84 किलोमीटर का लंबा फेरा लगाना पड़ता है। मयाली, बसुकेदार, अगस्त्यमुनि और गुप्तकाशी मार्ग से होकर सफर में पूरा दिन लग जाता है। इससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।
प्रस्तावित सड़क का लाभ
प्रस्तावित बधाणी ताल–भुनाल–भेडारू मोटर मार्ग बनने से यह दूरी मात्र 9 किलोमीटर रह जाएगी। इससे पूर्वी बांगर की 6 और पश्चिमी बांगर की 16 ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। क्षेत्र की करीब 15 से 20 हजार आबादी को राहत मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
संघर्ष समिति का नेतृत्व
यह आंदोलन बधाणी–छेनागाड़ मोटरमार्ग निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहा है। समिति के अध्यक्ष शिव लाल आर्य ने कहा —
“साल 1991 से आंदोलन जारी है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ग्रामीण ठगे गए हैं, लेकिन अब हम पीछे नहीं हटेंगे।”
अनशन पर उनके साथ केदार सिंह रावत और गैणू लाल भी बैठे हैं।
अधिकारियों से टकराव और नाराज़गी
अनशन स्थल पर पहुंचे लोनिवि के सहायक अभियंता संजय सैनी को ग्रामीणों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल वन विभाग की औपचारिकताओं का हवाला देकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि “हम गरीब हैं, अधिकारियों के चक्कर लगाने के लिए हमारे पास पैसे नहीं। सरकार को खुद मौके पर आकर हमारी बात सुननी चाहिए।”
तकनीकी अड़चनें और विभागीय स्थिति
सहायक अभियंता संजय सैनी ने बताया —
“बधाणी ताल से भुनाल गांव भेडारू तक 9 किमी मोटर मार्ग में 8 किमी वन भूमि और 1 किमी सिविल भूमि है। करीब 1271 पेड़ों की कटिंग प्रस्तावित है। वन विभाग, राजस्व विभाग और लोनिवि द्वारा चार बार निरीक्षण हो चुका है, लेकिन वैकल्पिक भूमि अभी तक नहीं मिली है। इस वजह से देरी हो रही है।”
बुजुर्गों की बिगड़ती तबीयत
अनशन पर बैठे तीनों बुजुर्गों की उम्र 80 वर्ष के आसपास है। उनका शुगर लेवल बढ़ गया है और स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है। ज्येष्ठ प्रमुख नवीन सेमवाल ने कहा कि
“ये बुजुर्ग अपने बच्चों के भविष्य के लिए भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन प्रशासन मौन है।”
आंदोलन को अब स्थानीय सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल रहा है।




