
रुद्रप्रयाग: बधाणीताल से भुनाल गांव तक 9 किलोमीटर मोटरमार्ग निर्माण की मांग को लेकर बीते चार दिनों से चल रही भूख हड़ताल आखिरकार गुरुवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गई। दो अनशनकारियों की हालत बिगड़ने पर डीएम प्रतीक जैन, विधायक भरत सिंह चौधरी और डीएफओ रजत सुमन मौके पर पहुंचे और आश्वासन दिया कि तीन दिनों के भीतर फॉरेस्ट क्लीयरेंस की फाइल शासन को भेज दी जाएगी। इसके बाद ग्रामीणों को जूस पिलाकर आंदोलन समाप्त करवाया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बांगर पट्टी क्षेत्र के ग्रामीण पिछले 35 वर्षों से मात्र 9 किलोमीटर सड़क निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। बधाणीताल से भुनाल गांव तक सड़क बनने से पश्चिमी और पूर्वी बांगर की 22 ग्राम पंचायतों को जोड़ा जा सकेगा, जिससे क्षेत्र की करीब 20 हजार की आबादी को राहत मिलेगी। मगर तीन दशक बीत जाने के बावजूद यह मांग अब तक अधूरी है।
सड़क न होने से ग्रामीणों को बीमार और गर्भवती महिलाओं को कंधों पर उठाकर किलोमीटरों दूर ले जाना पड़ता है। वहीं, क्षेत्र की आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हैं।
अनशन और स्वास्थ्य संकट
3 नवंबर को ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया। तीन बुजुर्ग ग्रामीण — शिवलाल आर्य, केदार सिंह रावत और गैणू लाल — भूख हड़ताल पर बैठे।
6 नवंबर की सुबह जब चिकित्सकों की टीम ने जांच की, तो दो अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ी पाई गई। उनका वजन कम हो चुका था और शुगर लेवल घट गया था। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 108 एंबुलेंस मंगवाई, मगर ग्रामीण तब तक अनशन समाप्त करने से इनकार करते रहे जब तक डीएम और विधायक स्वयं स्थल पर नहीं पहुंचे।
अधिकारियों और विधायक का हस्तक्षेप
स्थिति बिगड़ने पर विधायक भरत सिंह चौधरी, डीएम प्रतीक जैन और डीएफओ रजत सुमन अनशन स्थल पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से केवल आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।
डीएम प्रतीक जैन ने आश्वासन दिया,
“तीन दिनों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस की फाइल शासन को भेज दी जाएगी। एक माह के भीतर यह प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा ताकि प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो सके।”
वहीं, विधायक भरत सिंह चौधरी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को विधानसभा और शासन स्तर पर गंभीरता से उठाएंगे।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई गई।
सड़क निर्माण की वर्तमान स्थिति
डीएम ने बताया कि सड़क निर्माण प्रस्ताव वर्ष 2021 से प्रक्रिया में है। इस मार्ग में लगभग 8 किलोमीटर वन भूमि और 1 किलोमीटर सिविल भूमि आती है, जिसमें 1271 पेड़ (बांज, बुरांश एवं अन्य प्रजातियां) प्रभावित होंगे।
वन, राजस्व और लोक निर्माण विभागों के संयुक्त निरीक्षण के बाद 3.5 हेक्टेयर भूमि वृक्षारोपण के लिए चयनित की जा चुकी है।
प्रभागीय वनाधिकारी अब स्थल निरीक्षण करेंगे, जिसके बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
डीएम ने कहा —
“यह मेरी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि इस क्षेत्र को शीघ्र सड़क मार्ग से जोड़ा जाए। लोक निर्माण विभाग ने डीपीआर तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया है ताकि फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सके।”
ग्रामीणों की उम्मीदें और प्रशासन की जिम्मेदारी
ग्रामीणों ने प्रशासन के इस आश्वासन पर अनशन समाप्त करते हुए कहा कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन शुरू करेंगे। डीएम ने कहा कि यह क्षेत्र आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है, इसलिए शासन और जिला प्रशासन भारत सरकार से शीघ्र स्वीकृति के लिए अनुरोध करेगा।




