
देहरादून: शहर में प्रस्तावित रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के विरोध में दून और मसूरी के लगभग 150 नागरिकों द्वारा भेजा गया सामूहिक पत्र अब राज्य स्तर पर औपचारिक रूप से आगे बढ़ा दिया गया है। देहरादून सिटिजंस फोरम ने दिसंबर में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री को भेजे गए उसी पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित करते हुए कहा है कि परियोजना से जुड़े गंभीर पर्यावरणीय और भूवैज्ञानिक जोखिमों पर राज्य को भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नागरिकों का कहना है कि यह कोई नया पत्र नहीं है, बल्कि वही सामूहिक अपील है, जिसे पहले केंद्र स्तर पर रखा गया था और अब राज्य सरकार के समक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया है। फोरम के सदस्य पिछले कई महीनों से विशेषज्ञों के साथ संवाद कर वैकल्पिक यातायात समाधान सुझाते रहे हैं, ताकि शहर की यातायात समस्या का समाधान पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से हो सके।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
यह पत्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्धन, लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडेय और देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल को भेजा गया है। इसके अलावा मसूरी, कैंट, रायपुर, राजपुर रोड और धर्मपुर के विधायकों तथा नगर निगम देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल सहित कुल 11 जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी यह अपील भेजी गई है।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून सिटिजंस फोरम के अध्यक्ष अनूप नौटियाल ने कहा कि 26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड यातायात समस्या को सुलझाने के बजाय उसे नए इलाकों में स्थानांतरित कर देगा। नागरिकों ने इसे भूकंपीय रूप से संवेदनशील दून वैली के लिए जोखिमपूर्ण बताते हुए बाढ़, भूमि धंसाव, भूजल रिचार्ज में कमी, वायु गुणवत्ता पर असर और शहरी तापमान बढ़ने जैसी आशंकाएं जताई हैं।
आगे क्या होगा
फोरम ने एलिवेटेड कॉरिडोर के स्थान पर सशक्त सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक बसें, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, पैदल और साइकिल अनुकूल ढांचा तथा नदी किनारे ब्लू और ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि यदि इन विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाए, तो शहर की यातायात समस्या का समाधान पर्यावरणीय संतुलन के साथ संभव है।
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