
ऋषिकेश (मुनि की रेती): गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के गंगा रिजॉर्ट, मुनि की रेती में चल रहे सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन योग साधकों को विभिन्न यौगिक मुद्राओं और ध्यान तकनीकों का अभ्यास कराया गया। देश-विदेश से आए योग जिज्ञासुओं ने उत्साह के साथ सत्रों में भाग लिया।
मेडिटेशन से हुई दिन की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत योगगुरु डॉ. विपिन जोशी के मेडिटेशन सत्र से हुई, जहां साधकों को मानसिक शांति और एकाग्रता के गुर सिखाए गए। इसके बाद आर्ट ऑफ लिविंग के विशेषज्ञों ने प्राणायाम और श्वास तकनीकों पर अभ्यास कराया।
अयंगर योग से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक चर्चा
योगगुरु उषा माता ने अयंगर योग के महत्व को विस्तार से समझाया, जबकि योगाचार्य कपिल सांघवी ने प्राणायाम को मानसिक अवसाद से मुक्ति और जीवन को बेहतर बनाने का सरल उपाय बताया।
मीत प्रसन्ना, डॉ. कंचन जोशी और डॉ. अर्पिता नेगी ने योग के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए।
योग और विज्ञान का संगम
प्रो. कंचन जोशी ने योग में बायोमैकेनिक्स के महत्व पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद रयाल ने वैकल्पिक चिकित्सा—जैसे होम्योपैथी, एक्यूप्रेशर और प्राकृतिक चिकित्सा—के साथ योग के संबंध को समझाया।
गजल और संकीर्तन ने बांधा समा
शाम के सत्र में “वन्स अपोन ए टाइम्स” गजल ग्रुप ने शानदार प्रस्तुति देकर माहौल को संगीत से सराबोर कर दिया। वहीं गंगा आरती के दौरान इस्कॉन समूह के संकीर्तन ने योग साधकों को भक्ति में झूमने पर मजबूर कर दिया।
आयोजन में जुटे कई प्रमुख लोग
इस मौके पर जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन, महाप्रबंधक प्रशासन लक्ष्मीराज चौहान सहित कई अधिकारी और अतिथि मौजूद रहे।







