
देहरादून / ऋषिकेश: उत्तराखंड में मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने और पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ऋषिकेश में देश का दूसरा सबसे बड़ा और इंटरनेशनल लेवल का वर्ल्ड क्लास एक्वेरियम / नमामि गंगे लर्निंग इंस्टीट्यूट एंड सेंटर बनाने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 270 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मत्स्य विभाग और एनबीसीसी के बीच इसके लिए एमओयू साइन किया गया है। परियोजना का निर्माण कार्य 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
राज्य सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को मत्स्य पालन से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है। इसके साथ ही मत्स्य पालन को प्रशिक्षण, अनुसंधान और पर्यटन से जोड़ने की दिशा में यह परियोजना तैयार की गई है। ऋषिकेश चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार होने के साथ-साथ देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख केंद्र है, जिसे देखते हुए यहां इस सेंटर की स्थापना का निर्णय लिया गया है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मत्स्य विभाग के मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि नमामि गंगे लर्निंग इंस्टीट्यूट एंड सेंटर में प्रदेश के मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड में पाई जाने वाली मछलियों की विभिन्न प्रजातियों को यहां संरक्षित और प्रदर्शित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह सेंटर केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टूरिज्म के लिहाज से भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हो सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मत्स्य पालकों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस परियोजना से ऋषिकेश में पर्यटन को नया आकर्षण मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को तकनीकी जानकारी एवं बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।
आंकड़े और तथ्य
एनबीसीसी के मुख्य महाप्रबंधक नागेंद्र कुमार ने बताया कि यह परियोजना करीब 270 करोड़ रुपये की है। एक्वेरियम में इंटरनेशनल स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। इसका कुछ हिस्सा अंडरग्राउंड बनाया जाएगा, जहां दीवारों और छत के चारों ओर तैरती मछलियां दिखाई देंगी। यह पूरा एक्वेरियम सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम से लैस होगा और एक एजुकेशनल सेंटर के रूप में भी काम करेगा।
एमओयू के तहत पहले पांच वर्षों तक एक्वेरियम की देखरेख एनबीसीसी द्वारा की जाएगी। अहमदाबाद के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा एक्वेरियम होगा।
आगे क्या होगा
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। लक्ष्य है कि निर्धारित समय से पहले ही काम पूरा कर इसे आम लोगों और पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए। इससे मत्स्य पालन, शिक्षा और पर्यटन—तीनों क्षेत्रों को एक साथ मजबूती मिलेगी।
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