
ऋषिकेश— नरेंद्रनगर वन प्रभाग की शिवपुरी रेंज में पेयजल टैंक में गिरे एक गुलदार शावक को वन विभाग ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसकी मादा से मिला दिया। शावक के लापता होने पर मादा गुलदार आक्रामक हो रही थी, लेकिन वन टीम की तत्परता और ग्रामीणों की समझदारी से मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित घटना टल गई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के वर्षों में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भालू और गुलदार के हमलों की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिसके चलते मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर मुद्दा बन गया है। ऐसे माहौल में शिवपुरी रेंज से सामने आई यह घटना वन विभाग और स्थानीय लोगों की संवेदनशीलता और सजगता का उदाहरण साबित हुई है।
घटना कैसे हुई
तीन दिन पहले स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग को जानकारी दी कि शिवपुरी रेंज में स्थित एक गहरे खाली पेयजल टैंक में गुलदार का एक शावक गिर गया है। सूचना मिलते ही वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और देखा कि शावक कई फीट गहरे टैंक में फंसा हुआ था और बाहर निकलने का प्रयास कर रहा था।
वन क्षेत्राधिकारी विवेक जोशी ने बताया कि टीम को अंदेशा था कि शावक की तलाश में मादा गुलदार आसपास मौजूद हो सकती है और यदि उसे खतरे का आभास हुआ तो वह हमला भी कर सकती है। इस जोखिम को देखते हुए टीम ने शाम ढलने से पहले ही रेस्क्यू पूरा करने का निर्णय लिया और सुरक्षित तरीके से शावक को बाहर निकाल लिया।
मादा गुलदार की खोज और मिलन का क्षण
शावक को रेस्क्यू करने के बाद अगली चुनौती मादा गुलदार का पता लगाना था, जो शावक के गायब होने पर अत्यधिक आक्रामक हो सकती थी। वन विभाग ने कई स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए और गश्त बढ़ाई। कुछ ही घंटों में कैमरों में एक मादा गुलदार आसपास चहल-कदमी करते हुए नजर आई।
पुष्टि होने पर कि यह शावक उसी मादा का है, क्यूआरटी टीम ने सावधानीपूर्वक शावक को उसके पास छोड़ा। जैसे ही शावक मादा के करीब पहुंचा, वह दौड़कर उससे लिपट गया और मादा गुलदार भी उसे प्यार से चाटने लगी। इसके बाद दोनों को सुरक्षित जंगल की ओर जाते हुए देखा गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि टैंक में शावक को देखकर उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और समझदारी से तुरंत वन विभाग को सूचना दी। यदि वे घबराहट में कोई गलत कदम उठा लेते तो स्थिति बिगड़ सकती थी। ग्रामीणों ने वन विभाग के पेशेवर रवैये और संवेदनशीलता की भी सराहना की।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
डीएफओ नरेंद्रनगर दिगांथ नायक ने रेंजर विवेक जोशी और क्यूआरटी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह रेस्क्यू वन विभाग के वन्यजीवों के प्रति समर्पण और प्रेम को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि रेस्क्यू में कुछ घंटे की भी देरी होती, तो मादा गुलदार का व्यवहार खूंखार हो सकता था और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।
वन क्षेत्राधिकारी विवेक जोशी ने बताया कि मादा गुलदार अपने शावक की सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा सतर्क रहती है। शावक के गायब होने पर वह लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही थी और उसके स्वभाव में आक्रामकता दिखाई दे रही थी। इसलिए शावक को शीघ्र मादा से मिलाना वन विभाग की प्राथमिकता थी।
आगे क्या?
वन विभाग ने इस क्षेत्र में पेट्रोलिंग और निगरानी और मजबूत करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके। विभाग ग्रामीणों से भी अपील कर रहा है कि यदि उन्हें कहीं कोई वन्यजीव घायल या असहाय दिखे तो तुरंत सूचना दें।







