देहरादून: तीर्थनगरी ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव मंदिर तक श्रद्धालुओं की यात्रा अब बेहद आसान होने जा रही है। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 6.5 किलोमीटर लंबे ऋषिकेश–नीलकंठ रोपवे को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से स्वीकृति मिल गई है। राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में इस परियोजना को लेकर जानकारी दी गई। रोपवे के शुरू होने पर यह दूरी महज 15 मिनट में तय की जा सकेगी, जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी और शहर में यातायात दबाव भी कम होगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
वर्तमान में श्रद्धालुओं को ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव तक पहुंचने के लिए करीब 30 किलोमीटर सड़क मार्ग या लगभग नौ किलोमीटर का पैदल ट्रेक तय करना पड़ता है। खासकर श्रावण मास और पर्वों के दौरान भारी भीड़ के कारण मार्गों पर जाम और असुविधा आम बात है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने रोपवे निर्माण का निर्णय लिया था।
आधिकारिक जानकारी
यह रोपवे ऋषिकेश के त्रिवेणीघाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनाया जाएगा और इसमें मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला तकनीक का उपयोग होगा, जिसे अत्यधिक सुरक्षित माना जाता है। परियोजना की नोडल एजेंसी उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को बनाया गया है। चूंकि रोपवे का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से होकर गुजरेगा, इसलिए पहले राज्य वन्यजीव बोर्ड और अब राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
स्थानीय / मानवीय पक्ष
स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि रोपवे बनने से बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों के लिए यात्रा सरल होगी। साथ ही, सड़क पर वाहनों की संख्या घटने से ऋषिकेश में जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी।
चौरासी कुटी नए कलेवर में
राजाजी टाइगर रिजर्व में स्थित रमणीक स्थल चौरासी कुटी के पुनर्विकास प्रस्ताव को भी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने स्वीकृति दी है। यहां मौजूद संरचनाओं को उनके मूल स्वरूप में संवारा जाएगा और पर्यटक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। कार्यों की निगरानी के लिए अपर प्रमुख वन संरक्षक और राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक महीने में दो बार स्थलीय निरीक्षण करेंगे।
मनसा देवी मंदिर मार्ग का पुनर्निर्माण
धर्मनगरी हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर और उसके पहुंच मार्ग पर भूस्खलन से हुई क्षति के पुनर्निर्माण को भी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। इससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आवागमन को फिर से सुदृढ़ किया जाएगा।
अन्य प्रमुख उपलब्धियां
पिछले वर्ष जुलाई से दिसंबर के बीच वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े 56 प्रस्तावों के वन्यजीव प्रबंधन प्लान स्वीकृत किए गए, जबकि 29 मामलों में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी हुए। वन्यजीव हमलों में मृत्यु पर मुआवजा राशि छह लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। मानव–वन्यजीव संघर्ष की त्वरित प्रतिक्रिया के लिए 32 वन प्रभागों में 93 क्यूआरटी गठित की गई हैं। पिथौरागढ़, चंपावत और रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर के लिए स्थल चयन किया गया है। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में मिनी ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर और गंगोत्री नेशनल पार्क की नेलांग घाटी में नए व्यू प्वाइंट के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है।
आगे क्या होगा
रोपवे परियोजना को अब धरातल पर उतारने की तैयारी तेज होगी। संबंधित एजेंसियां डीपीआर और निर्माण प्रक्रिया को अंतिम रूप देंगी। परियोजना के पूर्ण होने से तीर्थाटन, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
