
ऋषिकेश। मकर संक्रांति के अवसर पर तपोवन, लक्ष्मणझूला और स्वर्गाश्रम क्षेत्रों में नेजा-निशान के साथ देव डोलियों के संगम की तैयारियों के बीच गंगा का घटा जलस्तर श्रद्धालुओं के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। घाटों के किनारे से पानी काफी पीछे हट जाने के कारण स्नान करना कठिन और कई स्थानों पर असुरक्षित हो गया है। मुख्य घाटों से गंगा की धारा करीब 100 मीटर दूर बह रही है, जिससे आचमन और स्नान के लिए श्रद्धालु जोखिम उठाने को मजबूर हैं। पर्व के दौरान बड़ी भीड़ की संभावना को देखते हुए यह स्थिति प्रशासन और श्रद्धालुओं—दोनों के लिए चिंता का विषय है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मकर संक्रांति पर्व पर हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऋषिकेश के गंगा घाटों पर स्नान के लिए पहुंचते हैं। देव डोलियों के संगम के साथ पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। लेकिन इस बार शीतकाल में जलस्तर कम होने से घाटों की पारंपरिक उपयोगिता प्रभावित हो रही है।
आधिकारिक जानकारी
सोमवार को मुनि की रेती, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, तपोवन और त्रिवेणीघाट के गंगा घाटों की स्थिति का जायजा लिया गया। मुनि की रेती स्थित पूर्णानंद घाट पर गंगा की मुख्य धारा घाट से करीब 100 मीटर दूर बहती दिखी। स्वामीनारायण घाट पर जलधारा मौजूद है, लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से बनाए गए ब्लॉक और अधिक ऊंचाई के कारण श्रद्धालु आचमन नहीं कर पा रहे हैं। त्रिवेणीघाट पर जेसीबी की मदद से जलधारा घाट तक लाई गई है, हालांकि उपलब्ध पानी घुटने से कम बताया जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि जलस्तर कम होने से श्रद्धालु दूर बह रही धारा तक जाने को मजबूर हैं, जिससे फिसलन और चोट का खतरा बढ़ गया है। उनका आग्रह है कि पर्व के दौरान अस्थायी सुरक्षित मार्ग और पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जाए।
आंकड़े / तथ्य
कई प्रमुख घाटों पर गंगा की मुख्य धारा घाट से लगभग 50 से 100 मीटर दूर बह रही है। कुछ स्थानों पर घाटों पर केवल पतली जलधारा उपलब्ध है, जो आचमन या सामूहिक स्नान के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
आगे क्या होगा
पर्व के मद्देनज़र प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि भीड़ प्रबंधन, चेतावनी संकेत, बैरिकेडिंग और सुरक्षित स्नान स्थलों की पहचान जैसे कदम तत्काल उठाए जाएं। जलस्तर की स्थिति के अनुसार अस्थायी व्यवस्थाओं पर निर्णय लिया जा सकता है।







