
ऋषिकेश / कर्णप्रयाग: सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के लिए यह वर्ष उपलब्धियों भरा रहा है। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के अनुसार वर्ष के दौरान 14.5 किलोमीटर सुरंगों की खोदाई की गई, जिससे कुल टनल कार्य का लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो गया है। पूरी परियोजना का अब तक करीब 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। पहाड़ी क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, जिससे चारधाम रेल कनेक्टिविटी का सपना साकार होने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना को वर्ष 2016 में स्वीकृति मिली थी और इसका निर्माण कार्य वर्ष 2020 में शुरू हुआ। 125 किलोमीटर लंबी यह परियोजना उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के साथ-साथ सामरिक और आपदा प्रबंधन के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जाती है। कठिन पहाड़ी भूगोल, सुरंगों और पुलों की अधिक संख्या के कारण यह देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल है।
आधिकारिक जानकारी
आरवीएनएल के अनुसार वर्ष के दौरान सुरंग निर्माण में बड़ी उपलब्धि हासिल की गई। अब तक कुल 40 सुरंगों में ब्रेक थ्रू (सुरंग आर-पार) किया जा चुका है, जबकि पूरी परियोजना में कुल 46 ब्रेक थ्रू प्रस्तावित हैं। इस वर्ष अकेले 9 ब्रेक थ्रू पूरे किए गए। दो सुरंगों का फाइनल लाइनिंग कार्य पूर्ण हो चुका है और पांच सुरंगों में यह कार्य अंतिम चरण में है। परियोजना में टनलों के भीतर ट्रैक की कुल लंबाई 213 किलोमीटर है, जिसमें अब केवल 11 किलोमीटर की खुदाई शेष है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेल परियोजना से रोजगार, पर्यटन और आपदा के समय राहत कार्यों में बड़ा लाभ मिलेगा।
व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि रेल संपर्क से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
संख्या / आंकड़े
पूरी परियोजना की लंबाई 125 किलोमीटर है।
टनल खोदाई का 95 प्रतिशत और कुल परियोजना का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
अब तक 40 ब्रेक थ्रू किए जा चुके हैं।
परियोजना में कुल 13 रेलवे स्टेशन और 19 पुल प्रस्तावित हैं, जिनमें से 8 पुल पूर्ण हो चुके हैं।
आगे क्या होगा
इस वर्ष ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। 750 करोड़ रुपये की लागत से ट्रैक बिछाने का कार्य इरकॉन इंटरनेशनल को सौंपा गया है, जिसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्टेशनों के निर्माण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है और कर्णप्रयाग रेलवे स्टेशन को और बड़ा बनाने के लिए अतिरिक्त 611 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक ओपी मालगुड़ी के अनुसार परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।






