
ऋषिकेश: नगर निगम क्षेत्र में वन भूमि को लेकर चल रही कार्रवाई से उत्पन्न संकट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों ने आवाज बुलंद की है। मंगलवार को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं विधायक प्रीतम सिंह से मुलाकात कर सरकार से विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने वन भूमि पर की जा रही कार्रवाई वाले आबादी क्षेत्रों को राजस्व ग्राम घोषित करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग उठाई। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में हजारों परिवारों के सामने बेघर होने का गंभीर खतरा खड़ा हो गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेशों के बाद ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र के कई इलाकों में वन भूमि को लेकर कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। यह वे क्षेत्र हैं, जहां लोग पिछले 50 से 60 वर्षों से निवास कर रहे हैं और जहां सरकारों की ओर से बिजली, पानी, सड़क और नगर निगम जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ऐसे में अचानक कार्रवाई की स्थिति ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है।
आधिकारिक जानकारी
कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि सभी कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की पहल करें। ज्ञापन में कहा गया कि इस सत्र में केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए, ताकि आबादी वाले क्षेत्रों को वन संरक्षण अधिनियम से बाहर कर ‘राजस्व ग्राम’ घोषित किया जा सके। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ और भूमि अधिग्रहण पर पूर्ण विराम लगाने की गारंटी दी जाए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पार्षद एडवोकेट अभिनव सिंह मलिक ने कहा कि ऋषिकेश की जनता लंबे समय से झूठे आश्वासनों से थक चुकी है और अब बड़ी उम्मीद के साथ विपक्ष की ओर देख रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो हजारों परिवारों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।
संख्यात्मक विवरण
क्षेत्रवासियों के अनुसार इस कार्रवाई से हजारों परिवार प्रभावित हो सकते हैं, जो दशकों से इन इलाकों में रह रहे हैं और जिनकी आजीविका पूरी तरह स्थानीय क्षेत्र पर निर्भर है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने जल्द विशेष सत्र बुलाकर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो इस मुद्दे को राज्यव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा। फिलहाल ज्ञापन के माध्यम से सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।







