
देहरादून: साल 2025 के अंतिम दिनों में ऋषिकेश क्षेत्र की आरक्षित वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गठित समिति की निगरानी में वन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीमें 2000 एकड़ से अधिक भूमि का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं और खाली जमीनों को चिन्हित कर अपने नियंत्रण में ले रही हैं। यह कार्रवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि वर्षों से विवादों में रही इस भूमि पर अब पहली बार इतने बड़े स्तर पर समन्वित प्रयास हो रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश क्षेत्र में फैली हजारों एकड़ वन भूमि लंबे समय से अवैध अतिक्रमण की चपेट में रही है। कई हिस्सों में न तो स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध था और न ही वन विभाग का प्रत्यक्ष नियंत्रण। समय-समय पर शिकायतें सामने आती रहीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यह मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया।
आधिकारिक जानकारी
वन विभाग के अनुसार यह अभियान उनकी पहल पर नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गठित पांच सदस्यीय समिति की निगरानी में संचालित हो रहा है। देहरादून जिले में वन विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग के करीब 350 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी इस अभियान में लगाए गए हैं। प्राथमिक चरण में खाली पड़ी भूमि को चिन्हित कर नियमानुसार वन विभाग के कब्जे में लिया जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से इलाके में हलचल बढ़ गई है। कुछ लोगों ने इसे वन संरक्षण के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कई निवासी इस बात को लेकर आशंकित हैं कि आगे चलकर रिहायशी इलाकों पर भी कार्रवाई न हो। लोगों का कहना है कि उन्हें पूरी जानकारी और पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया समझाई जानी चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस पूरे मामले की जड़ वर्ष 1950 से जुड़ी है। 26 मई 1950 को ऋषिकेश में पशु लोक सेवा मंडल संस्थान को लगभग 2866 एकड़ भूमि 99 वर्षों की लीज पर, यानी वर्ष 2049 तक दी गई थी। बाद में इस भूमि के कुछ हिस्से विभिन्न सरकारी विभागों को आवंटित हुए, लेकिन शेष भूखंडों पर धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण हो गया।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
इसी भूमि विवाद को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया और राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने अतिक्रमण की जांच और कार्रवाई के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए। इसके बाद उत्तराखंड शासन ने समिति का गठन कर स्थलीय निरीक्षण, दस्तावेजों की जांच और खाली भूमि को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की।
अधिकारियों का बयान
वन विभाग के चीफ गढ़वाल धीरज पांडे ने बताया कि टीमें लगातार रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं और उन भूखंडों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्हें बिना विवाद के वन विभाग के नियंत्रण में लिया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में अतिक्रमण पर और सख्त कार्रवाई हो सकती है।
आंकड़े / तथ्य
इस अभियान में 350 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं। मामला 2000 एकड़ से ज्यादा वन भूमि का है, जिसमें से पहले चरण में लीज से जुड़ी खाली जमीनों पर कार्रवाई की जा रही है। दूसरे दिन तक कई भूखंड वन विभाग के कब्जे में लिए जा चुके हैं, हालांकि अंतिम आंकलन अभी जारी है।
आगे क्या होगा
प्रशासन के अनुसार रिकॉर्ड सत्यापन पूरा होने के बाद अतिक्रमित भूमि पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी, जिससे वन भूमि को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।





