
ऋषिकेश: ऋषिकेश के बापूग्राम, बीसबीघा, मीरानगर और शिवाजीनगर समेत कई क्षेत्रों में वन विभाग की हालिया कार्रवाई के विरोध में जनआक्रोश खुलकर सामने आया। बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित विशाल जनसभा में स्थानीय नागरिकों ने केंद्र और प्रदेश सरकार से साफ शब्दों में कहा कि इन आबादी वाले क्षेत्रों को तत्काल राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाए, ताकि दशकों से रह रहे परिवारों का अस्तित्व सुरक्षित रह सके। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि वर्षों से बसे हजारों परिवारों को उजाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ऋषिकेश क्षेत्र के कई इलाकों में वन भूमि से जुड़ा विवाद गहराया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले 50–60 वर्षों से यहां रह रहे हैं और समय-समय पर सरकारों ने स्वयं बिजली, पानी, सड़क और नगर निगम जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इसके बावजूद अचानक वन विभाग की कार्रवाई से हजारों परिवारों पर बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
सभा में उठी प्रमुख मांग
जनसभा में वक्ताओं ने नगर निगम क्षेत्र की वन भूमि समस्या पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। उनका कहना था कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सदन के पटल पर ठोस प्रस्ताव पारित किया जाए, जिसे केंद्र सरकार को भेजकर इन आबादी वाले क्षेत्रों को वन संरक्षण अधिनियम से बाहर कर राजस्व ग्राम घोषित कराया जाए।
आधिकारिक जानकारी
बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक रमेश जुगलान ने कहा कि जब तक राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ और भूमि अधिग्रहण पर पूर्ण विराम की गारंटी सदन में ली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि हजारों बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की छत बचाने का सवाल है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से बसे मोहल्लों में अचानक कार्रवाई से भय का माहौल बन गया है। लोगों ने एक स्वर में मांग की कि सरकार जनभावनाओं को समझते हुए स्थायी समाधान निकाले।
वन विभाग का पक्ष
वन क्षेत्राधिकारी गंभीर सिंह धमांदा ने बताया कि बृहस्पतिवार को केवल कागजी कार्रवाई की गई है। जल्द ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी, जिसमें नगर निगम और तहसील प्रशासन भी मौजूद रहेगा। बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आंकड़े / तथ्य
स्थानीय लोगों के अनुसार 50–60 वर्षों से आबादी बसे क्षेत्रों में कार्रवाई का खतरा बना है। बापूग्राम, बीसबीघा, मीरानगर और शिवाजीनगर जैसे कई इलाके प्रभावित बताए जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच प्रस्तावित बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। आंदोलनकारियों ने कहा है कि यदि ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।







