
ऋषिकेश: शनिवार सुबह त्रिवेणी घाट, चंद्रेश्वरनगर और मायाकुंड क्षेत्रों में अचानक प्रशासनिक गतिविधि बढ़ने से हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों को जानकारी मिली कि टिहरी बांध जलाशय भूकंप से प्रभावित हुआ है और गंगा में भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इससे अफरा-तफरी मच गई। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह जिला आपदा परिचालन केंद्र की ओर से की जा रही मॉक ड्रिल का हिस्सा था, जिसमें तीन लोग बहने से बचाए गए और पांच लोग भगदड़ में घायल हो गए।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में भूकंप के खतरे और टिहरी बांध की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन समय-समय पर विभिन्न एजेंसियों के साथ आपदा तैयारियों की मॉक ड्रिल करता है। शनिवार को भी ऐसी ही एक बड़ी ड्रिल आयोजित की गई, जिसके लिए सुबह नौ बजे जिला आपदा परिचालन केंद्र की ओर से स्थानीय प्रशासन को अलर्ट भेजा गया। इस अलर्ट में बताया गया कि टिहरी जनपद में आए भीषण भूकंप से जलाशय की स्थिति प्रभावित हुई है और एहतियातन तीन हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया है।
आधिकारिक जानकारी
मॉक ड्रिल के दौरान घटना की कल्पित स्थिति इतनी वास्तविक लगी कि कई स्थानों पर लोगों में घबराहट फैल गई। प्रशासन को मिले अलर्ट के तुरंत बाद त्रिवेणी घाट, मायाकुंड और चंद्रेश्वरनगर क्षेत्रों को खाली कराया गया। सुरक्षा के लिए बिजली आपूर्ति भी रोक दी गई और राहत-बचाव कार्य शुरू किए गए। विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर लगभग पांच सौ लोगों को सुरक्षित निकालकर चारधाम ट्रांजिट केंद्र के रिलीफ कैंप में पहुंचाया, जहां खाने-पीने और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध थीं।
ड्रिल के दौरान अचानक गंगा के जलस्तर में संभावित वृद्धि की चेतावनी मिलने पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें पांच लोग घायल हो गए। घायलों को एसडीआरएफ और पुलिस कर्मियों ने तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस से उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसी दौरान तीन लोग गंगा के तेज बहाव में फंस गए, जिन्हें एसडीआरएफ और जल पुलिस ने मुश्किल परिस्थितियों में रेस्क्यू किया।
चंद्रेश्वरनगर में गंगा के उफान से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की एक दीवार को भी नुकसान पहुंचा, जिसके चलते प्लांट को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मॉक ड्रिल के दौरान क्षेत्र में अफरा-तफरी के बीच स्थानीय लोगों का कहना था कि अचानक पुलिस और प्रशासनिक टीमें देखकर उन्हें वास्तविक आपदा की आशंका हुई। एक निवासी ने बताया, “हमें लगा कि वास्तव में टिहरी से पानी छोड़ा गया है। बाद में जानकारी मिली कि यह अभ्यास था, लेकिन घबराहट तो हो ही गई थी।”
आगे क्या?
दोपहर एक बजे मॉक ड्रिल समाप्त होने के बाद एसडीएम योगेश मेहरा ने सभी विभागों से फीडबैक लिया। उन्होंने रेस्पांस टाइम कम करने और राहत-बचाव की प्रक्रिया को और मजबूत करने पर जोर दिया। सामने आई कमियों को दूर करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश भी जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसी ड्रिलें जारी रहेंगी ताकि किसी वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सके।






