
देहरादून: साइबर अपराधियों ने कानून का भय दिखाकर ऋषिकेश के एक बुजुर्ग दंपती को डिजिटल अरेस्ट में रखकर करीब 69 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोप है कि ठगों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय, साइबर क्राइम सेल और सर्वोच्च न्यायालय का अधिकारी बताकर आधार नंबर से 10 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन का झांसा दिया। गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की की धमकियों के बीच दंपती को लगभग 60 दिनों तक व्हाट्सएप कॉल और वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया। मानसिक दबाव में आकर पीड़ितों ने कई बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के महीनों में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर साइबर ठगी के मामले बढ़े हैं, जिनमें ठग कानून प्रवर्तन एजेंसियों का डर दिखाकर पीड़ितों को लंबे समय तक मानसिक दबाव में रखते हैं। बुजुर्ग और अकेले रहने वाले लोग इस तरह की ठगी के लिए अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं। यह घटना उसी ट्रेंड की गंभीर मिसाल है।
आधिकारिक जानकारी
पुलिस के अनुसार, इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के दौरान बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, विस्तृत प्रगति को लेकर अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं। उनका मानना है कि वरिष्ठ नागरिकों को बार-बार जागरूक करने की जरूरत है, ताकि वे किसी भी अज्ञात कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
आंकड़े / विवरण
पीड़ित दंपती के अनुसार, ठगों ने करीब 60 दिनों तक उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा और इस दौरान कुल 69 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। इस ठगी ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है और उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है।
आगे क्या होगा
साइबर क्राइम पुलिस बैंकिंग ट्रांजैक्शनों की ट्रेसिंग कर रही है और आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम से आने वाली कॉल पर तुरंत विश्वास न करें और ऐसी स्थिति में स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।





