
ऋषिकेश: रोडवेज प्रशासन की ओर से ऋषिकेश से दिल्ली के लिए वातानुकूलित एक्सप्रेस बस सेवा शुरू कर दी गई है। इस सेवा के तहत जनरथ टू बाई टू पुशबैक एसी बसों का संचालन किया जा रहा है, जिससे यात्री लगभग पांच घंटे में दिल्ली पहुंच सकेंगे। यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए इस रूट पर फिलहाल दो वातानुकूलित जनरथ बसें चलाई जा रही हैं, जिनकी ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश–दिल्ली रूट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं। निजी बसों और ट्रेनों पर बढ़ते दबाव के चलते यात्रियों की ओर से रोडवेज से आरामदायक और समयबद्ध सेवा की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए रोडवेज मुख्यालय ने इस रूट पर वातानुकूलित जनरथ एक्सप्रेस सेवा शुरू की है।
सेवा का संचालन और समय-सारिणी
रोडवेज को एक माह पूर्व दो अनुबंधित जनरथ टू बाई टू पुशबैक बसें प्राप्त हुई थीं। पहली बस ऋषिकेश से सुबह 10 बजे रवाना होती है और दोपहर तीन बजे दिल्ली पहुंचती है। यह बस रात 10 बजे दिल्ली से ऋषिकेश के लिए चलती है और तड़के तीन बजे ऋषिकेश पहुंचती है।
दूसरी बस ऋषिकेश से दोपहर दो बजे प्रस्थान करती है और शाम सात बजे दिल्ली पहुंचती है। यह बस रात 12 बजे दिल्ली से रवाना होकर सुबह पांच बजे ऋषिकेश पहुंचती है।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड परिवहन निगम के अनुसार, इन बसों की ऑनलाइन बुकिंग निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर की जा सकती है। बसों में यात्रियों की सुविधा के लिए हीटर सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
किराया और सुविधाएं
ऋषिकेश–दिल्ली एसी जनरथ एक्सप्रेस बस का एकतरफा किराया 694 रुपये निर्धारित किया गया है। टू बाई टू पुशबैक सीट व्यवस्था के कारण यात्रियों को लंबी यात्रा में अतिरिक्त आराम मिलेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
यात्रियों का कहना है कि कम समय में दिल्ली पहुंचने वाली एसी रोडवेज सेवा शुरू होने से उन्हें निजी बसों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों ने भी इस पहल को सुविधाजनक बताया है।
रोडवेज ऋषिकेश डिपो के सहायक महाप्रबंधक नरेंद्र कुमार ने बताया कि रोडवेज मुख्यालय की ओर से डिपो को दो अनुबंधित वातानुकूलित जनरथ बसें मिली हैं। इन दोनों बसों को दिल्ली रूट पर एक्सप्रेस सेवा के रूप में संचालित किया जा रहा है, जो लगभग पांच घंटे में दिल्ली पहुंचाती हैं। किराया भी यात्रियों के लिए किफायती रखा गया है।
आगे क्या होगा
यदि यात्रियों की संख्या और मांग में बढ़ोतरी होती है, तो भविष्य में इस रूट पर और वातानुकूलित बसें चलाने पर भी विचार किया जा सकता है।







