
ऋषिकेश को 31 दिसंबर तक बालश्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ श्रम विभाग ने तीन चरणों में अभियान शुरू कर दिया है। पहले चरण में व्यापारियों को जागरूक किया जा रहा है, जबकि आगे चलकर दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट्स में बालश्रम पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बालश्रम को लेकर शहर में समय–समय पर शिकायतें मिलती रहती हैं। कई छोटे प्रतिष्ठान, रेस्टोरेंट, ढाबे और रिपेयरिंग सेंटरों में नाबालिग बच्चों के काम करने की जानकारी विभाग को मिलती रही है। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए श्रम विभाग अब अभियान मोड में आ गया है।
अधिकारिक जानकारी
शनिवार को शैल विहार स्थित श्रम उपायुक्त कार्यालय में स्थानीय व्यापारियों के साथ बैठक हुई। सहायक श्रम आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि विभाग ने तीन-चरणीय अभियान तैयार किया है।
पहला चरण — जागरूकता
व्यापारियों को बालश्रम कानून, दंड प्रावधान और सामाजिक प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
दूसरा चरण — सार्वजनिक घोषणा
सभी दुकान संचालकों को अपनी दुकान, होटल या प्रतिष्ठान के बाहर यह नोटिस लगाना होगा कि— “हमारे यहां 18 वर्ष से कम आयु का कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं है।”
तीसरा चरण — छापेमारी और कानूनी कार्रवाई
विभागीय टीमें बाजारों, होटलों, रेस्टोरेंट, ढाबों, वर्कशॉप और रिपेयरिंग सेंटरों में निरीक्षण करेंगी। यदि कहीं भी बाल श्रमिक मिला, तो संचालक पर बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
बैठक में शामिल व्यापारियों ने कहा कि बालश्रम रोकना सामूहिक जिम्मेदारी है और वे विभाग के अभियान में सहयोग देंगे।
एक व्यापारी ने कहा, “यदि शहर को बालश्रम मुक्त बनाना है तो सभी व्यापारियों को नियमों का पालन करना होगा।”
आगे क्या होगा
श्रम विभाग दिसंबर के अंत तक शहर में लगातार निगरानी रखने वाला है। अधिकारी बोले कि अभियान के अंतिम चरण में किसी भी प्रतिष्ठान को छूट नहीं मिलेगी। विभाग ने व्यापारियों से कानून का पालन करने और नाबालिगों को काम पर न रखने की अपील की है।






